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आज नही कल शाम को जाना!

बहूत दिनों के बाद मिलें हो क्योँ जाने कि जिद करते हो|
आ ही गए हो ठहर के जाना, आज नही कल शाम को जाना|

तुम्हे रोकने कि ख्वाहिश नहीं है, पर कहना है मेरे दिल का|
तेरे साथ मैँ बरबस ना करुँगा, कुछ समझो मेरी मुश्किल का|

पहले भी तुम जा सकते हो, पर करना ना झुठा बहाना|
आ ही गए हो ठहर के जाना, आज नही कल शाम को जाना|

पहले लू जैसा आलम था, अब बारिश सा मौसम होगा|
दिल में घटाएं घिरने लगेँगी और आँखोँ में सावन होगा|

मेरा कहा मानो बस इतना इस बारिश में भींग के जाना|
आ ही गए हो ठहर के जाना, आज नही कल शाम को जाना|

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Comment by CHANDAN KUMAR on January 21, 2011 at 11:39am
गणेश जी बहुत बहुत धन्यवाद!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 21, 2011 at 10:09am

चन्दन जी ओपन बुक्स ऑनलाइन पर आपके पहले पोस्ट का ह्रदय से स्वागत है , सुंदर रचना आपने लिखी है ,

 

पहले लू जैसा आलम था, अब बारिश सा मौसम होगा|
दिल में घटाएं घिरने लगेँगी और आँखोँ में सावन होगा|,
ये पक्तिया बेहद खुबसूरत बन पड़ी है , बहुत खूब , बधाई स्वीकार करे |

कृपया ध्यान दे...

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