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“तुम्हारा एहसास”

तुम साथ नहीं हो
लेकिन फिर भी
ऐसा लगता है
कि तुम यहीं हो
फुलों में, हवाओ में
पतझड़ में, बहारों में
घटाओ में, फिजाओं में
हर एक चीज में
तेरी याद बसती है
हर चेहरे मे, हर नजारे में
बस तु ही मुझे दिखती है
ग़र मै भुलना चाहूँ
फिर भी नहीं भुल सकता
क्योंकी मेरी हर साँस
बस तेरी ही बात कहती है
मेरे दिल की हर घड़कन
बस तेरा ही नाम लेती है...

बस तेरा ही नाम लेती है...

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Comment

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Comment by Raju on January 21, 2011 at 9:53pm
dhanywaad bhaiya
Comment by R. K. PANDEY "RAJ" on January 21, 2011 at 7:27pm

wah raju bhayi wah ! kya baat hai....bahut hee sundar ehsaaspurn kawita likha hai apne.

Comment by Raju on January 21, 2011 at 7:04pm
Dhanywaad Ashish bhai..
Comment by आशीष यादव on January 21, 2011 at 3:23pm
वाह, बस तू ही तू छायी है| खुबसूरत रचना भैया| बधाई स्वीकार करें|

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