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हर  सुबह नई आशा  के साथ जागो;

 दिल में विश्वास रखो ऊपर वाले के प्रति;

गिरो अगर तो गिरकर संभालो खुद को;

जिन्दगी में जीत फिर तुम्हारी होगी!

ये मत सोचो क्या खो दिया;

रखो आशा कुछ पाने की;

मत रो अपनी विफलता पर ;

लिखो नयी इबारत कामयाबी की!

संघर्षो की राह पर चलकर  ;

मंजिल पालो सपनो की;

गम की गर्मी में तपकर ही

मिलेंगी सांसे राहत की!

जीवन कर्म का स्थल है;

आराम  यहाँ  कहाँ  करना  है;

निज  प्रयास

की क्यारी  को खुशियों  के फूलो 

 से  भरना  है !

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Comment

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Comment by shalini kaushik on January 22, 2011 at 8:11pm
बहुत सुंदर . . . .....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 22, 2011 at 3:13pm

जीवन कर्म का स्थल है;

आराम  यहाँ  कहाँ  करना  है;

निज  प्रयास

की क्यारी  को खुशियों  के फूलो 

 से  भरना  है !

 

बहुत ही खुबसूरत सन्देश देती यह रचना , बहुत खूब शिखा जी , बधाई स्वीकार कीजिये |

कृपया ध्यान दे...

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