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पिताजी की डायरी से...
स्मृति में..

मेरे नगमे तुम्हारे लबो पर,

अचानक ही आते रहेंगें .
एक गुजरी हुई जिंदगी में ,

फिरसे वापस बुलाते रहेगें.


याद आयेगा तुमको सरोवर

और पीपल की सुन्दर ये छाया .
ये बिल्डिंग खड़ी याद होगी ,

जिसको यादों में हमने बसाया .
बरबस ये कहेंगे कहानी ,

और हम मुस्कराते रहेगें.


कोई मिशिर है कोई यादव,

कोई चौबे कोई तिवारी.
हर किसी की अलग बात होगी,

चाहें नर हो या कोई नारी.
याद आयेगें ज़माने की बातें,

और हम गुनगुनाते रहेगें .


सामने होगा मंदिर ओ जंगल,

ये धाम जहाँ बैठे हैं बाबा.
जिनपर निछावर है सब कुछ,

काशी मथुरा अयोध्या काबा.
सरोवर में फूले कमल पर,

भौरे गीत गाते रहेगें.
मेरे नगमे तुम्हारे लबो पर,

अचानक ही आते रहेंगें .
-----अवधेश कुमार तिवारी

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Comment by R N Tiwari on February 1, 2011 at 10:13pm
आप  लोगों    के  मर्मस्पर्शी विचारों को पढ़कर महसूस हुआ की भोजपुरी समाज की भावुकता अद्वितीय और बेमिशाल है. बहूत बहूत धन्यवाद..
---आर .एन .तिवारी

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 30, 2011 at 12:45pm
R . N तिवारी जी आपका यह प्रयास बेहद सराहनीय है , आदरणीय अवधेश कुमार तिवारी जी की कृति शायद ही हम लोग पढ़ पाते , यह आपके कारण संभव हो सका है | उम्मीद करते है कि आपकी भी कृतियाँ पढ़ने को मिलेगी, निवेदन है कि अन्य रचनाकारों की रचनाओं पर भी अपना विचार व्यक्त करे साथ ही १ फरवरी से ३ फरवरी तक चलने वाले महा इवेंट मे अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे |

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