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R N Tiwari's Blog (23)

पिता जी से सुनी एक कहानी.

पिता जी से सुनी एक कहानी.

 

प्राचीन काल में एक ब्रह्मण देवता थे जो अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे.एक दिन वे गंगा स्नान के लिए जा रहे थे , रास्ते में एक गिद्धिनी मिली जो गर्भिणी थी .उसने ब्राह्मण से कहा कृपया मेरा एक उपकार कर दीजिये. गंगा किनारे गिद्धराज एकांत में बैठे होंगें जो मेरे पति हैं, उनसे कह दीजियेगा की आपकी पत्नी आदमी का मांस खाना चाहती है. ब्राह्मण ने देखा गंगा किनारे बहुत सरे गिद्ध बैठे हुए हैं उसमें एक…

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Added by R N Tiwari on June 15, 2011 at 9:18am — No Comments

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.

 


न जीव चाहिए न जहान चाहिए ,

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.

हैरत हो बाढ़  से या प्लेग का जमाना,

हैजा भूकंप और गोली का निशाना.

न आंख चाहिए न कान चाहिए,

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.



संविधान प्रजातंत्र पार्टी  व  नेता ,

घूस लूट फूट गुट दुनियां को देता,

न मान चाहिए न सम्मान चाहिए.

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.



आरक्षण की बोल के बोली…

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Added by R N Tiwari on June 10, 2011 at 3:00pm — No Comments

अब भगवान पैदा कर...

अब भगवान पैदा कर...

मेरा कहना अगर मानो तो,

एक इन्सान पैदा कर.

सम्हाले डोलती नैया,

बना बलवान पैदा कर.

तुम्हारे ही इशारे पर,

सभी ये दृश्य आते हैं.

हमारी प्रार्थना तुमसे…

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Added by R N Tiwari on June 9, 2011 at 8:00am — 2 Comments

जिंदगी है प्यासी सुधा के लिए..

  जिंदगी है प्यासी सुधा के…
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Added by R N Tiwari on May 28, 2011 at 8:00pm — 5 Comments

ज्ञान का दीप

ज्ञान का दीप

जिंदगी प्रेम में ही  गर  मिली रह गयी,
ज्ञान का दीप कैसे जला पाओगे ?…

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Added by R N Tiwari on May 15, 2011 at 7:00pm — 2 Comments

निराशा ने घेरा..

 

 

 

निराशा ने घेरा..

 

निशा का समय है दिशा में अँधेरा,

अज्ञानता में बसाया है डेरा.

चलता हुआ ठोकरें खा रहा है,

रोना जहाँ पर वहीँ गा रहा…

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Added by R N Tiwari on March 22, 2011 at 9:07pm — 3 Comments

रंग अपना अपना ..

रंग अपना अपना ..



हर आदमी में होता है, रंग अपना अपना ।

उड़ान भर रहे हैं, लेकर के अपनी कल्पना।।

पूरी हुई न अबतक, इस जिंदगी में राहें।

यदि थक गया है कोई, तो भर रहा है आहें।

कुछ और आगे चलने का, रह गया है सपना।।

हर आदमी में…

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Added by R N Tiwari on March 13, 2011 at 6:00pm — 1 Comment

चक्र..

चक्र..

चैन और बेचैन का, चक्र चले दिन रात,

सुख दुःख के ही भोग में, यह आयी बारात.…

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Added by R N Tiwari on February 27, 2011 at 8:30pm — 7 Comments

लाभ क्या मिला ?

लाभ क्या मिला ?









लाभ क्या मिला ?

पिता जी की डायरी…
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Added by R N Tiwari on February 20, 2011 at 10:05am — No Comments

कर्म और भाग्य

पिताजी की डायरी से....



कर्म और भाग्य



बैठे बैठे दे दिया ,हाथ पावं न मैल',

चलते चलते मर गया, तेली के घर बैल.

कुत्ता चलता कर में, गाय न पावे घास ,

पास किया तो फेल है ,फेल हो गया पास.

कुछ न किया, सब हो गया,किसी का पूरा काम.

करत करत कोई थक गया ,मिला नहीं आराम.

फूंक फूंक कर पग धरे, बिगड़त जावे सब काम.

मसल मसल कर चल पड़े. दुनिया करे सलाम.

राम भरोसे पर रहे ,चलती जावे रेल.

धीरज कभी न छोडिये ,सब प्रभु का है खेल.

चींटी ले शक्कर चली,… Continue

Added by R N Tiwari on February 18, 2011 at 10:46pm — No Comments

तब और अब



तब और अब

कुशल छेम पूछत रहे , दिल में राखी सनेह I


चले गए वे लोग सब, तजि मानुष के देह II

समय समय का खेल यह, भला बुरा न होय I

कारन सदा अदृश्य है, जानि  सके न कोय II

चला गया सो चला गया , वर्तमान को जान I

आगे क्या फिर आएगा , उसको भी पहचान…

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Added by R N Tiwari on February 16, 2011 at 12:17pm — No Comments

पिताजी की डायरी से..

पिताजी की डायरी से..…















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Added by R N Tiwari on February 14, 2011 at 5:57pm — No Comments

दो आंख

 

 

 …

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Added by R N Tiwari on February 13, 2011 at 7:41am — No Comments

स्मृति में..

 

पिताजी की डायरी से...

स्मृति में..



मेरे नगमे तुम्हारे लबो पर,

अचानक ही आते रहेंगें .

एक गुजरी हुई जिंदगी में ,

फिरसे वापस बुलाते रहेगें.



याद आयेगा तुमको सरोवर

और पीपल की सुन्दर ये छाया .

ये बिल्डिंग खड़ी याद होगी ,

जिसको यादों में हमने बसाया .

बरबस ये कहेंगे कहानी ,

और हम…

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Added by R N Tiwari on January 28, 2011 at 10:00am — 2 Comments

नेता जी.

 

 

 

 

पिताजी की डायरी से.....



नेता जी.


राजनीती कहवा से सिखलीं, नेता भयिलिन कहिया .

हम  ता   देखली  कोल्हुवाड़े  में,चाटत  रहलीं महिया.  

त्यागी तपस्वी बनी नाही,कैसे चली यी गाड़ी.

काहें जाएब पटना…
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Added by R N Tiwari on January 26, 2011 at 12:13pm — 3 Comments

पिताजी की डायरी से.......

पिताजी की डायरी से.......



मनुष्य में कुछ भावनाएं स्थाई रूप से रहती हैं. उन भावनाओं में परिवर्तन धीरे धीरे आता है.एक लम्बे समय के बाद उसके स्थान पर दूसरी भावना आती है.प्राचीन काल में भारतीय भावना यही रहती थी की ईश्वर को प्रसन्न रखना है. जिसके परिणाम स्वरुप वह… Continue

Added by R N Tiwari on January 25, 2011 at 9:25pm — 1 Comment

मोती बीए: भोजपुरी कवि (1919-2009)







मोती बीए: भोजपुरी कवि (1919-2009)…

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Added by R N Tiwari on January 25, 2011 at 11:33am — 1 Comment

नहीं रहे भारत के रत्न पंडित भीमसेन जोशी

नहीं रहे भारत के रत्न…
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Added by R N Tiwari on January 24, 2011 at 10:00am — 13 Comments

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