For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

R N Tiwari's Blog (23)

पिता जी से सुनी एक कहानी.

पिता जी से सुनी एक कहानी.

 

प्राचीन काल में एक ब्रह्मण देवता थे जो अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे.एक दिन वे गंगा स्नान के लिए जा रहे थे , रास्ते में एक गिद्धिनी मिली जो गर्भिणी थी .उसने ब्राह्मण से कहा कृपया मेरा एक उपकार कर दीजिये. गंगा किनारे गिद्धराज एकांत में बैठे होंगें जो मेरे पति हैं, उनसे कह दीजियेगा की आपकी पत्नी आदमी का मांस खाना चाहती है. ब्राह्मण ने देखा गंगा किनारे बहुत सरे गिद्ध बैठे हुए हैं उसमें एक…

Continue

Added by R N Tiwari on June 15, 2011 at 9:18am — No Comments

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.

 


न जीव चाहिए न जहान चाहिए ,

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.

हैरत हो बाढ़  से या प्लेग का जमाना,

हैजा भूकंप और गोली का निशाना.

न आंख चाहिए न कान चाहिए,

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.



संविधान प्रजातंत्र पार्टी  व  नेता ,

घूस लूट फूट गुट दुनियां को देता,

न मान चाहिए न सम्मान चाहिए.

बस कुर्सी पर केवल बेईमान चाहिए.



आरक्षण की बोल के बोली…

Continue

Added by R N Tiwari on June 10, 2011 at 3:00pm — No Comments

अब भगवान पैदा कर...

अब भगवान पैदा कर...

मेरा कहना अगर मानो तो,

एक इन्सान पैदा कर.

सम्हाले डोलती नैया,

बना बलवान पैदा कर.

तुम्हारे ही इशारे पर,

सभी ये दृश्य आते हैं.

हमारी प्रार्थना तुमसे…

Continue

Added by R N Tiwari on June 9, 2011 at 8:00am — 2 Comments

जिंदगी है प्यासी सुधा के लिए..

  जिंदगी है प्यासी सुधा के…
Continue

Added by R N Tiwari on May 28, 2011 at 8:00pm — 5 Comments

ज्ञान का दीप

ज्ञान का दीप

जिंदगी प्रेम में ही  गर  मिली रह गयी,
ज्ञान का दीप कैसे जला पाओगे ?…

Continue

Added by R N Tiwari on May 15, 2011 at 7:00pm — 2 Comments

निराशा ने घेरा..

 

 

 

निराशा ने घेरा..

 

निशा का समय है दिशा में अँधेरा,

अज्ञानता में बसाया है डेरा.

चलता हुआ ठोकरें खा रहा…

Continue

Added by R N Tiwari on March 22, 2011 at 9:07pm — 3 Comments

रंग अपना अपना ..

रंग अपना अपना ..



हर आदमी में होता है, रंग अपना अपना ।

उड़ान भर रहे हैं, लेकर के अपनी कल्पना।।

पूरी हुई न अबतक, इस जिंदगी में राहें।

यदि थक गया है कोई, तो भर रहा है आहें।

कुछ और आगे चलने का, रह गया है सपना।।

हर आदमी में…

Continue

Added by R N Tiwari on March 13, 2011 at 6:00pm — 1 Comment

चक्र..

चक्र..

चैन और बेचैन का, चक्र चले दिन रात,

सुख दुःख के ही भोग में, यह आयी बारात.…

Continue

Added by R N Tiwari on February 27, 2011 at 8:30pm — 7 Comments

लाभ क्या मिला ?

लाभ क्या मिला ?









लाभ क्या मिला ?

पिता जी की डायरी…
Continue

Added by R N Tiwari on February 20, 2011 at 10:05am — No Comments

कर्म और भाग्य

पिताजी की डायरी से....



कर्म और भाग्य



बैठे बैठे दे दिया ,हाथ पावं न मैल',

चलते चलते मर गया, तेली के घर बैल.

कुत्ता चलता कर में, गाय न पावे घास ,

पास किया तो फेल है ,फेल हो गया पास.

कुछ न किया, सब हो गया,किसी का पूरा काम.

करत करत कोई थक गया ,मिला नहीं आराम.

फूंक फूंक कर पग धरे, बिगड़त जावे सब काम.

मसल मसल कर चल पड़े. दुनिया करे सलाम.

राम भरोसे पर रहे ,चलती जावे रेल.

धीरज कभी न छोडिये ,सब प्रभु का है खेल.

चींटी ले शक्कर चली,… Continue

Added by R N Tiwari on February 18, 2011 at 10:46pm — No Comments

तब और अब



तब और अब

कुशल छेम पूछत रहे , दिल में राखी सनेह I


चले गए वे लोग सब, तजि मानुष के देह II

समय समय का खेल यह, भला बुरा न होय I

कारन सदा अदृश्य है, जानि  सके न कोय II

चला गया सो चला गया , वर्तमान…

Continue

Added by R N Tiwari on February 16, 2011 at 12:17pm — No Comments

पिताजी की डायरी से..

पिताजी की डायरी से..…















Continue

Added by R N Tiwari on February 14, 2011 at 5:57pm — No Comments

दो आंख

 

 

 …

Continue

Added by R N Tiwari on February 13, 2011 at 7:41am — No Comments

स्मृति में..

 

पिताजी की डायरी से...

स्मृति में..



मेरे नगमे तुम्हारे लबो पर,

अचानक ही आते रहेंगें .

एक गुजरी हुई जिंदगी में ,

फिरसे वापस बुलाते रहेगें.



याद आयेगा तुमको सरोवर

और पीपल की सुन्दर ये छाया .

ये बिल्डिंग खड़ी याद होगी ,

जिसको…

Continue

Added by R N Tiwari on January 28, 2011 at 10:00am — 2 Comments

नेता जी.

 

 

 

 

पिताजी की डायरी से.....



नेता जी.


राजनीती कहवा से सिखलीं, नेता भयिलिन कहिया .

हम  ता   देखली  कोल्हुवाड़े  में,चाटत  रहलीं महिया.   …

Continue

Added by R N Tiwari on January 26, 2011 at 12:13pm — 3 Comments

पिताजी की डायरी से.......

पिताजी की डायरी से.......



मनुष्य में कुछ भावनाएं स्थाई रूप से रहती हैं. उन भावनाओं में परिवर्तन धीरे धीरे आता है.एक लम्बे समय के बाद उसके स्थान पर दूसरी भावना आती है.प्राचीन काल में भारतीय भावना यही रहती थी की ईश्वर को प्रसन्न रखना है. जिसके परिणाम स्वरुप वह… Continue

Added by R N Tiwari on January 25, 2011 at 9:25pm — 1 Comment

मोती बीए: भोजपुरी कवि (1919-2009)







मोती बीए: भोजपुरी कवि (1919-2009)…

Continue

Added by R N Tiwari on January 25, 2011 at 11:33am — 1 Comment

नहीं रहे भारत के रत्न पंडित भीमसेन जोशी

नहीं रहे भारत के रत्न…
Continue

Added by R N Tiwari on January 24, 2011 at 10:00am — 13 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"शुक्रिया आ. तेज वीर सिंह जी "
9 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"सुक्रिया आ. समर सर "
9 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"शुक्रिया आ. सुरखाब भाई "
9 minutes ago
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मन मार्जियां "
"जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल बह्र और क़वाफ़ी के हिसाब से समय चाहती…"
8 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। अब न चर्चा करो तुम मेरी मुहब्बत की हुजूऱ ।अब तलक मुझको…"
13 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"हार्दिक बधाई आदरणीय निलेश जी।बेहतरीन गज़ल। तुम क्या गए तमाम नगर अजनबी हुआ मुद्दत हुई है घर से…"
13 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुआवज़ा - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
13 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (ज़ख्म सारे दर्द बन कर)
"वाह बढ़िया ग़ज़ल ज़नाब जोहैब जी..तीसरे शेर में रदीफ़ेन दोष है क्या?"
14 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (सुन कर ये तिरी ज़ुल्फ़ के मुबहम से फ़साने)
"वाह बहुत ही खूब ग़ज़ल हुई है ज़नाब..मुबारक़"
14 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय सतविंद्र जी बढ़िया ग़ज़ल कही है..सादर"
14 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "दीवाना "
"अच्छी ग़ज़ल कही ज़नाब प्रदीप जी..बधाई"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service