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चक्र..
चैन और बेचैन का, चक्र चले दिन रात,
सुख दुःख के ही भोग में, यह आयी बारात.
भांति भांति अनुभव किये, भांति भांति के लोग,
चार दिनन के वास्ते ,बिधि ने रचाई योग.
सब रस धरती पर मिले ,सब रस की ही खान.
एक रस बसे आकाश में,जान सके तो जान.
बाटन  वाले भी ,यहाँ लूटन वाले हज़ार,
कहीं सत्य की चाह है , कहीं झूठ दरबार.
कौन नहीं है जगत में ,राजा, रंक, फकीर ,
कहीं बसत बहेलिया,कहीं सन्तन की   भीर.
सब आये हैं जगत में, खेल रहे निज खेल ,
एक दिन समय वो आयेगा ,छूट जाये भव  रेल.
आना जाना जगत में, रहना है दिन चार,
अपनी बोली बोल के, जाना है उसपार.
हाट लगा है बाट में ,सौदा किया अपार,
सूना सूना रह गया , सपने का संसार.
चक्की चलती रात दिन, पिस पिस हूए पिसान,
अज्ञानी धारण किये ,अब भी अपनी शान.
तप तप तपसी ने कहा , छोड़ जगत की आश ,
राम नाम जपते रहो, जब तक तन में सांस .
सत्य एक है झूठ सब , एक से हो कल्यान,
सब कुछ पाने को चला ,पा न सका नादान.
---रामेश्वर नाथ तिवारी

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Comment

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Comment by R N Tiwari on March 3, 2011 at 10:45am
धन्यवाद.
Comment by Abhinav Arun on March 2, 2011 at 2:29pm
जीवन का सार आपने काव्य में उड़ेल दिया मार्ग दिखाती ,सच बतलाती रचना बधाई |
Comment by R N Tiwari on March 1, 2011 at 11:49am

 

श्री गणेश जी बागी, रश्मि प्रभा जी,देवी नागरानी जी, एवं विवेक मिश्र ताहिर जी.
आप सब को    विनम्र धन्यवाद.
आर .एन. तिवारी

Comment by विवेक मिश्र on March 1, 2011 at 9:19am

हाट लगा है बाट में ,सौदा किया अपार,
सूना सूना रह गया , सपने का संसार./

सारे ही दोहे एक से बढ़कर एक लगे. हार्दिक बधाई स्वीकार करें.

क्या कविता के साथ लगा चित्र 'नीमसार' (सीतापुर) का है?

Comment by Devi Nangrani on March 1, 2011 at 4:22am
आना जाना जगत में, रहना है दिन चार,
अपनी बोली बोल के, जाना है उसपार.
Bahut hi sunder bhav bhari dohavali zindagi ki soch se buni hui..
Comment by rashmi prabha on February 28, 2011 at 7:38pm
bahut hi achhi rachna

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 28, 2011 at 7:32pm

हाट लगा है बाट में ,सौदा किया अपार,
सूना सूना रह गया , सपने का संसार.
चक्की चलती रात दिन, पिस पिस हूए पिसान,

 

वाह वाह , बेहद खुबसूरत रचना , आंचलिक  शब्दों  का प्रयोग रचना में चार चाँद लगाते है, नमन उस लेखनी को जिसने इतनी  सुंदर कविता को जन्म दिया | बहुत बहुत बधाई आर एन तिवारी जी |

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