For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अब भगवान पैदा कर...

अब भगवान पैदा कर...

मेरा कहना अगर मानो तो,

एक इन्सान पैदा कर.

सम्हाले डोलती नैया,

बना बलवान पैदा कर.

तुम्हारे ही इशारे पर,

सभी ये दृश्य आते हैं.

हमारी प्रार्थना तुमसे ,

अब सम्मान पैदा कर.

हजारों कुर्सियां रोतीं की ,

सहभागी नहीं भेजा.

ये हमने देख ली दुनिया,

कोई अनजान पैदा कर.

पढ़ा है हमने दृश्यों को,

कोई दुर्भाग्य लिखा है.

डूबाने को ही भेजे हो,

यहाँ नादान पैदा कर,

मिलीं हैं लाख तस्बीरें,

लगे नफरत के हैं रिश्ते.

अब एक तस्बीर में भरकर ,

श्रद्धा ,इमान पैदा कर.

अगर बर्बाद करने के ,

तमाशे हो रहे तेरे,

हमारो दर्शनों के वास्ते,

अब भगवान पैदा कर.

रामेश्वर नाथ तिवारी

 

Views: 28

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by R N Tiwari on June 9, 2011 at 6:53pm
विनम्र धन्यवाद !!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 9, 2011 at 9:20am
आहा ! बहुत खूब ....

अगर बर्बाद करने के ,
तमाशे हो रहे तेरे,
हमारो दर्शनों के वास्ते,
अब भगवान पैदा कर.

वाह वाह भाई रामेश्वर नाथ जी , बहुत ही खुबसूरत कविता रच दी है आपने, साधुवाद इस शानदार अभिव्यक्ति हेतु|

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

विरह अग्नि में दह-दह कर के

गीत मात्र भार १६ १६ बहला रहा रोज इस दिल को,  किस्से बचपन के कह कर के.तेरी महकी महकी यादें,मैंने रख…See More
10 minutes ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा

221 2121 1221 212 हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया दुश्वारियों को पांव के नीचे दबा दिया - मेरी…See More
10 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे
"वाह लाजबाब अशआर, बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको "
11 minutes ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीया राजेश दीदी हार्दिक बधाई स्वीकारें!"
1 hour ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post समय का फेर(लघु कथा)
"शुक्रिया।"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० सुशील सरना जी ,जब अपनों की  मुबारकबाद मिलती है तो मन मस्तिष्क में नव ऊर्जा का संचार होता…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० अफरोज़ साहब , आपकी मुबारकबाद सर आँखों पर बहुत बहुत शुक्रिया आपका ."
2 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय राजेश कुमारी जी इस सम्मान के लिए आपको तहे दिल से मुबारकबाद। ऊपरवाले से प्रार्थना है की वो…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० महेंद्र कुमार जी ,आपका तहे दिल से बेहद शुक्रिया ."
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० समर भाई जी ,आप जैसे विद्वान् उरूज के हस्ताक्षर का आशीर्वाद भी मेरे लिए किसी इनाम से कम नहीं…"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post असाधारण आस
"अँधियारे सूने में अब मेरी अनवस्थाएँ गहरी एक दिया आस का फिर भी जलती लो से काँप-काँप है बटोरता…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० मोहम्मद आरिफ़ जी ,दिल से बेहद शुक्रगुज़ार हूँ .मेरा नेट आज ही ठीक हुआ .आपने यहाँ मेरी उपलब्धि को…"
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service