For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जिंदगी है प्यासी सुधा के लिए..

  जिंदगी है प्यासी सुधा के लिए..
जिंदगी है प्यासी सुधा के लिए,
और तुम तो ज़हर ही पिलाते रहे.
गुन  गुनाते रहे हम मधुर राग में,
मेरे राहों में कांटे बिछाते रहे,
नहीं चाहता मैं ऊँची अटारी ,
सच्चाई  हमको है दुनिया में प्यारी.
मैं चाहता हूँ शीतल हवाएं ,
तुम तो धरा को तपाते रहे,
खिले हों सुमन, और नजदीक  हों ,
तो मेरी नज़र भी  ना मजबूर हो.
मैं पलकें  उठाये खड़ा रह गया ,
और तुम तो दीवारें उठाते रहे,
मेरे अधरों में देखो मधुर राग है,
मेरे पलकों में  दुनियां का  समभाव  है,
नहीं चाहता कोई बर्बाद हो पर,
तुम तो हकीक़त छुपाते रहे,
जब तेरी ये दुनिया मुनासिब नहीं,
ऐसी दुनिया का मैं भी हूँ आशिक नहीं.
मेरी तकदीर ऊँची सदा के लिए ,
और तुम बंधनों को लगाते रहे.   

-------रामेश्वर नाथ तिवारी

Views: 530

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on June 1, 2011 at 6:34pm

खूबसूरत।

Comment by Ajay Singh on June 1, 2011 at 5:27pm
veryyyyy  gooooodddd
Comment by Abhinav Arun on May 30, 2011 at 12:23pm
waah achchee zameen kee rachna aur behad prabhaaavee bhee badhaaee kabool karen r.n. jee

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 30, 2011 at 9:57am
आदरणीय आर एन तिवारी जी, अच्छी रचना प्रस्तुत किया है आपने, भाई राणा ने कुछ इशारा किये है, निवेदन है की अन्य साथियों की रचनाओं पर भी अपनी बेबाक राय दिया करे, जिससे सार्थक साहित्य सृजन में सहयोग हो सके |

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on May 29, 2011 at 3:07pm

आदरणीय तिवारी जी 

आपका ई- मेल मिला ...अस्तु यहाँ चाला आया|

रचना अच्छी है ..कथ्य अच्छा है ..शिल्प में थोड़ी कमियां हैं...इसके अतिरिक्त व्याकरण की दृष्टि से भी एक दो जगह त्रुटियाँ हैं ..मसलन 

"नहीं ताज हमको है दुनिया में प्यारी"...यहाँ पर ताज का लिंग गलत तरीके से प्रयोग किया गया है\

 

मेरे पलकों में दुनियां की सुभाग है,...यहाँ भी सुभाग का गलत लिंग चुना गया है|

 

बहुत बहुत धन्यवाद\

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
May 30
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
May 30
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service