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ग़ज़ल- अब राजनीति सबकी रगों में समा गई

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अब राजनीति सबकी रगों में समा गई

विश्वास खो गया,तो कंही आस्था गई ।।

मैं देखता हूँ मेरे नगर में ये क्या हुआ, 

लडकी खुशी-खुशी से ही इज्जत लुटा गई।

हर मोड पर जो शहर के आवारगी खडी, 

मैं क्या करूँ बजुर्गों की चिन्ता बढा गई।

बादल न जाने किसके हवन पर गया कंही,

रूठी  हुई  सी  तन्हा  अकेली  हवा गई।

महफिल में ही किसी ने मेरी बात छेड दी,

सुनते ही इतना रूप की गागर लजा गई।

मैं इन्तजार में खडा था रेलगाडी की,

पागल हवा अकेली थी,नज़रें लडा गई।  

यह ग़ज़ल- मौलिक व अप्रकाशित है।

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Comment by सूबे सिंह सुजान on April 3, 2014 at 10:46pm

जब राजनीति हाथ पसारे दिखाई दे।

जब अपना भी किनारे-किनारे दिखाई दे।।

उस वक़्त राजनीति में नेता को छान लो,

बेदाग,साफ जो हो उसे नेता मान लो ।।

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 27, 2014 at 12:03am

अजय कुमार सिंह..आपका धन्यवाद भाई

Comment by अजय कुमार सिंह on January 26, 2014 at 2:09am

मतला खूब पसन्द आया सूबे सिंह जी. हार्दिक बधाई.

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 20, 2014 at 4:34pm

वीनस केसरी,

भाई साहब आपकी मेहरबानी.......शुक्रिया

Comment by वीनस केसरी on January 20, 2014 at 2:58am

महफिल में ही किसी ने मेरी बात छेड दी,

सुनते ही इतना रूप की गागर लजा गई।

वाह हुज़ूर शानदार ग़ज़ल हुई है ... ढेरो दाद

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 19, 2014 at 2:39pm

जितेन्द्र 'गीत',

जी , आपके शब्दों से , ापकी हौंसला अफजाई  से मुझे भी हौंसला मिला है धन्यवाद

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 17, 2014 at 10:35am

हर मोड पर जो शहर के आवारगी खडी, 

मैं क्या करूँ बजुर्गों की चिन्ता बढा गई।

बादल न जाने किसके हवन पर गया कंही,

रूठी  हुई  सी  तन्हा  अकेली  हवा गई।

बहुत खुबसूरत गजल, यह शेर खास हुए दाद कुबूल कीजिये आदरणीय  सूबे सिंह जी

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 17, 2014 at 9:26am

बृजेश नीरज

जी ापकी बात सही है। लेखन में त्रुटि हुी है।

 सलाह के लिये आपका शुक्रिया, 

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 17, 2014 at 9:05am

रमेश कुमार चौहान,   जी रमेश जी बधाई स्वीकार है। आपका प्यार व स्नेह प्राप्त हुआ धन्यवाद

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 17, 2014 at 9:04am

योगराज प्रभाकर, योगराज जी , नमस्कार..आपकी बात वाज़िब है। आपका स्नेह मिला बहुत बहुत शुक्रिया। उम्मीद है भविष्य में भी आपका स्नेह बराबर मिलता रहेगा।

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