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चुनावी [कुण्डलिया]

वादे नेता कर रहे , चुनावी है पुलाव
बीते पाँचों साल के कौन भरेगा घाव
कौन भरेगा घाव समझना चालें इनकी
रोटी कपड़ा वास नहीं है बस में जिनकी
सरिता कहती भाँप नहीं हैं नेक इरादे
निर्वाचन कर सोच झूठ हैं इनके वादे

...........मौलिक व अप्रकाशित...........

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Comment by Sarita Bhatia on March 21, 2014 at 8:15pm

आदरणीय जितेन्द्र जी हार्दिक आभार रचना आपको पसंद आई 

Comment by Sarita Bhatia on March 21, 2014 at 8:14pm

आदरणीय श्याम जी हार्दिक आभार 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 17, 2014 at 10:59pm

 वर्तमान में चुनावी माहौल के रहते  बहुत अच्छी रचना आदरणीया सरिता जी, आपको हार्दिक बधाई

Comment by Shyam Narain Verma on March 15, 2014 at 4:03pm
सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर

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