For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

महिला दिवस पर [कुण्डलिया]

सारी दुनिया कर रही अब तेरी पहचान
तू दुर्गा तू शक्ति है तेरा कर्म महान /
तेरा कर्म महान नहीं बनना तू अबला
खुद की कर पहचान हुई तू सक्षम सबला
पहचानो अधिकार करो शिक्षित हर नारी
होना कभी न मौन झुकेगी दुनिया सारी //

.........मौलिक व अप्रकाशित...........

Views: 637

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 26, 2014 at 8:04pm

बहुत सार्थक और सटीक.. 

हार्दिक बधाई आदरणीया

Comment by बृजेश नीरज on March 14, 2014 at 8:28pm

सुन्दर कुण्डलियाँ! आपको हार्दिक बधाई!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 14, 2014 at 8:09pm

शिल्प पर  कसी हुई सुन्दर सार्थक कुण्डलिया ....बहुत खूब हार्दिक बधाई प्रिय सरिता जी. 

Comment by Sarita Bhatia on March 14, 2014 at 10:41am

सही कहा आपने आदरणीय ओमप्रकाश जी 

महिला को महिला समझ जाये तो पूरी समस्या हल हो जाये 

Comment by Sarita Bhatia on March 14, 2014 at 10:40am

आदरणीय नादिर भाई हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 14, 2014 at 10:39am

आदरणीय गिरिराज जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 14, 2014 at 10:39am

शुक्रिया आदरणीया कल्पना जी 

Comment by Sarita Bhatia on March 14, 2014 at 10:38am

शुक्रिया श्याम नारायण जी 

Comment by Omprakash Kshatriya on March 14, 2014 at 7:20am

महिला से महिला मिल जाए तो आधी समस्या हल हो जाए .

Comment by नादिर ख़ान on March 13, 2014 at 10:24pm

खुद की कर पहचान हुई तू सक्षम सबला 
पहचानो अधिकार करो शिक्षित हर नारी ..

सुंदर अभिव्यक्ति, महिलाओं को प्रेरणा देती हुयी ...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service