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होली [कुण्डलिया]

होली के दिन सब मिलो लेकर सारे रंग
गाओ मिलकर फाग को सब यारों के संग /
सब यारों के संग धूम तुम खूब मचाओ
नीला पीला लाल हरा गुलाबी लगाओ
शिकवे सारे भूल चले आओ हमझोली

रंगों का त्योहार ,आ गया है अब होली //

.............मौलिक व अप्रकाशित............

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Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 14, 2014 at 11:37pm

सुन्दर कुण्डली !
होली की शुभकामनाएं !!

Comment by Madan Mohan saxena on March 13, 2014 at 5:01pm
होली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाऐ .



प्रियतम क्या प्रिया क्या अब सभी रंगने को आतुर हैं
चलो हम भी बोले होली है तुम भी बोलो होली है .

मदन मोहन सक्सेना
Comment by Sarita Bhatia on March 13, 2014 at 11:39am

आदरनी अन्नपूर्णा जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 13, 2014 at 11:38am

आदरणीय गिरिराज जी हार्दिक आभार मात्रा ठीक कर ली हैं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 13, 2014 at 11:37am

आदरणीय लक्ष्मन जी हार्दिक आभार 

Comment by annapurna bajpai on March 13, 2014 at 11:00am

वाह !! आ0 सरिता भाटिया जी बहुत खूब होली पर कुण्डलिया की रचना की है बहुत बधाई आपको । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 12, 2014 at 10:03pm

आदरणीया सरिता जी , सामयिक कुन्डलिया के लिये बधाई , आदरणीय , नीला पीला लाल औ' हरा गुलाबी लगाओ , इस पंक्ति मे मात्रा ग़डबड- है , गिन के देख लीजियेगा ॥

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 12, 2014 at 7:37pm

सामयिक कुंडलिया छंद रचने हेतु बधाई आदरणीया सरिता भाटिया जी 

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