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खेला नया हर पल ही रचाती है जिन्दगी |

2212     2211     221     212 

पल में रुलाती पल में हँसाती है जिन्दगी
खेला नया हर पल ही रचाती है जिन्दगी |


ऐ नौजवानों देश के इतिहास अब रचो
हर रोज ही इक पाठ सिखाती है जिन्दगी | 


टूटे हैं जो विश्वास कहीं आइने से अब
फिर रोज क्यों विश्वास दिलाती है जिन्दगी ?


गुलशन कभी पतझड़ कभी मेरी है बगिया में
कैसे कहाँ क्या रंग दिखाती है जिन्दगी |


जब भी विचारों में घुली हैं रंजिशें यहाँ
ऐसे विचारों से जहर पिलाती है जिन्दगी |


माहौल का है ऐसा हुआ कुछ अभी असर
गुल रोज ही अब एक खिलाती है जिन्दगी |


हम हों कहीं भी झुकते नहीं हैं कभी मगर
अपनों के आगे हमको झुकाती है जिन्दगी |
....................................................

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 27, 2014 at 5:16pm

आदरणीया सरिता जी , सुन्दर ग़ज़ल हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ !!  ये बहर मान्य बह्र है या नही इसमे शंका है , किसी जानकार का इंतिज़ार करना चाहिये !!

Comment by अरुन 'अनन्त' on March 27, 2014 at 2:12pm

जीवन को परिभाषित करने का सुन्दर प्रयास किया है आपने बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on March 27, 2014 at 2:12pm

आदरणीया सरिताजी,

जीवन के उतार चढ़ाव को सुंदर शब्दों में प्रस्तुत किया है , हार्दिक बधाई ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 26, 2014 at 10:37am

बहुत सुंदर गजल कही आपने आदरणीया सरिता जी

टूटे हैं जो विश्वास कहीं आइने से अब
फिर रोज क्यों विश्वास दिलाती है जिन्दगी ?............इस शेर पर ढेरों बधाई स्वीकारें

Comment by Sarita Bhatia on March 26, 2014 at 10:22am

आदरणीय भुवन जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 26, 2014 at 10:21am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 26, 2014 at 10:20am

आदरणीय दी कल्पना जी हार्दिक आभार स्नेह बनाये रखें 

मैंने सुधार कर लिया है आपने सही कहा अब इसे ऐसे पढ़ें 

जब भी विचारों में घुली हैं रंजिशें यहाँ
ऐसे विचारों से ही मिटाती है जिन्दगी |

Comment by Sarita Bhatia on March 26, 2014 at 10:18am

आदरणीय अभिनव जी हार्दिक आभार ..सादर 

Comment by Sarita Bhatia on March 26, 2014 at 10:17am

जी मुकेश जी हार्दिक आभार ,जी मौलिक नहीं है 

Comment by भुवन निस्तेज on March 25, 2014 at 11:43pm

आदरणीया बहुत ही खूबसूरत भाव हैं आप के....

हम हों कहीं भी झुकते नहीं हैं कभी मगर 
अपनों के आगे हमको झुकाती है जिन्दगी

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