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नन्ही गुड़िया ( कुण्डलिया छंद )

नन्ही गुड़िया चंचला ,खेले दौड़े खूब । 

नन्हे नन्हे पाँव हैं ,मनभावन है रूप ॥ 

मनभावन है रूप , तोतली बातें करती । 

बात बात मुस्कात ,सभी के मन को हरती॥ 

करे सभी  से प्यार ,हमारी प्यारी मुन्नी । 

सभी लड़ाते लाड़, मोहिनी गुड़िया नन्ही ।। 

अप्रकाशित एवं मौलिक 

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Comment

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 11, 2014 at 12:30am

सुंदर, मासूमियत ली हुई रचना. बधाई आदरणीया अन्नपूर्णा दीदी

Comment by annapurna bajpai on April 10, 2014 at 10:17pm

आ0 मीना दी , एवं कुंती दीदी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by coontee mukerji on April 10, 2014 at 9:47pm

बहुत सुंदर .....बधाई आपको

Comment by Meena Pathak on April 10, 2014 at 2:44pm

बहुत सुन्दर कुण्डलिया छन्द .. बधाई आप को 

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