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ताँका पाँच पंक्तियों और 5,7,5,7,7= 31 वर्णों के लघु कविता


1.हर चुनाव
बदले तकदीर
नेताओं का ही
सोचती रह जाती
ये जनता बेचारी ।।

2.लूटते सभी
सरकारी संपदा
कम या ज्यादा
टैक्स व काम चोर
इल्जाम नेता सिर ।।

3.उठा रहे है
नजायज फायदा
चल रही है
सरकारी योजना
अमीर गरीब हो ।।

4.जनता चोर
नेता है महाचोर
शर्म शर्माती
कदाचरण लगे
सदाचरण सम ।।

5.जल भीतर
अटखेली करती
मीनो का झुण्ड़
सड़ा एक मछली
दूषित सारे नीर

6.चिंतन करो
चिंता चिता की राह
क्या समाधान
व्यस्त रखो जी तन
मस्त रखो जी मन ।।
........................
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by coontee mukerji on May 2, 2014 at 3:10am

बहुत सुंदर रचना.हार्दिक बधाई5.जल भीतर
अटखेली करती
मीनो का झुण्ड़
सड़ा एक मछली
दूषित सारे नीर.....सादर

Comment by रमेश कुमार चौहान on May 1, 2014 at 3:00pm

आदरणीय मिश्राजी एवं श्रीवास्तव जी सादर धन्यवाद

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 1, 2014 at 2:44pm

शासन प्रशासन नेता जनता सबका सत्य " ताँका" में , हार्दिक बधाई 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 1, 2014 at 1:41pm

रमेश जी मेरी तरफ से इन चौको के लिए ढेर सारी बधाई सादर 

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