For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कहानी-भावना (प्रियंका ओम)

उसका मानना था उसमे और बांकी की औरतो में कोई खास फरक नहीं है बल्कि उसकी स्थिति उनसे कहीं बेहतर है । उसके पास कम से कम चॉइस है किसके साथ जाना है किसके साथ नहीं वो उसका चुनाव खुद करती है लेकिन उसके जैसो के अलावा के पास कोई चॉइस नहीं है और उनको ये सब करके कोई खास ख़ुशी नहीं मिलती, मज़बूरी में करती है । लेकिन जिस काम को करके कोई ख़ुशी नहीं मिलती उसमे आत्मा मर जाती है रह जाता है सिर्फ शारीर; पैसा पॉवर और प्रमोशन ऐसी बहुत सी जिजिबिषा है जिसके लिए उन्हें अपनी आत्मा को मारना पड़ता है और जिंदगी भर ढोते है शारीर.

उसके माथे पे कॉल गर्ल का स्टीकर नहीं लगा हुआ है और न ही गले में प्राइस टैग लटक रहा है, वो तंग गलियों की सस्ती दुकानों में उपलब्ध नहीं है ।उसकी कीमत देने वाले बिना धुले कपड़े पहने पसीने की दुर्गन्ध लिए नहीं होते न ही वो होते जिनके पेट निकले हुए होते या वो जो पान मशाला चबाते है। पेट निकला हुआ शारीर उसे भद्दा लगता था और पान मशाला की गंध से एक खास किस्म की घृणा थी, उसे उबकाई आने लगती थी। ये घृणा  उसे बहुत पहले हो गई थी जब बस वाले अंकल ने उसके स्कूल यूनिफार्म पर बाईं ओर लिखे स्कूल के नाम को " कितने अच्छे से लिखा हुआ है " कह कर सहलाया था।उस अंकल का पेट निकला हुआ था और वो गुटखा खाते थे ! अगले दिन ही किसी की शिकायत पर उस अंकल को नौकरी से निकाल दिया गया था । उसका मन घृणा से भर गया, उसके मुँह का स्वाद बिगड़ गया था उसने माउथवाश से कुल्ला किया और सैमसंग गैलेक्सी निकाल फेसबुक में अपनी नई पिक्चर अपलोड कर दी उसके बाद कमेंट्स की बाढ़ में पिछला सब भूल गई।

पिक्चर में वो अपने बाईं हाथ की कोहनी को टेबल जैसी किसी ठोश चीज़ पर टिका रखा था और उसका आधा गला कलाई से और आधा चेहरा उसकी हथेली में छुपा था उसके लम्बे लम्बे नाखून काले रंग से रंगे हुए थे और बीच की अंगुली में उसने प्लैटिनम में जड़ित नीले रंग का पत्थर पहना हुआ था जो उसके नीले रंग की टॉप और काले रंग की स्कर्ट से मैच खा रहे थे।
ऐसा उसने जान बूझ कर किया था, इस पिक्चर के पहले वाली रात वो जिसके साथ थी वो चेहरे से बहुत ही मासूम दिख रहा था लेकिन बिस्तर पर जाते ही वो भूखा जानवर बन गया था । 
कौन कहता है दुनियाँ से सफ़ेद टाईगर्स बिलुप्त हो रहे है ।
अपने गले पर कला निशाँ देखकर उसने पूछा भी था ' आज से पहले कोई मिली नहीं "
'शादी शुदा हूँ ' लड़के ने संछिप्त सा उत्तर दिया था ।
'ऐसा लगा तो नहीं ' मुँह बना कर कहा था उसने।

फाउंडेशन से भी वो दाग छुप नहीं पाया था, उसने अंगूठी से मैचिंग ड्रेस भी इसलिए पहनी कि उसके परफेक्ट स्टाइल सेंस में बांकी सब नज़रअंदाज़ हो जाये और ऐसा हुआ भी; मिनटों में ही उसे सौ से भी ज्यादा लाइक्स और कमेंट्स मिल गए थे जिसमे सिर्फ उसकी तारीफ की गई थी ।
फेसबुक पर रोज पिक्चर बदलना उसका सौख नहीं नशा था। बाज़ार में मिलने वाली कीमत से उसे कभी इतनी संतुस्टी नहीं मिलती जितनी फेसबुक के लाइक्स और कमेंट्स से ।

वो उम्र के उस उस पड़ाव पर थी जहाँ रात को मम्मी पापा के कमरे से आने वाली चुरिओ की आवाज़ और सुबह बिस्तर पर बिखड़ी सलबटे उसे बेचैन कर देती थी । न्यूज़ पेपर का " सेक्स एक्सपर्ट " कार्नर के सवाल जवाब उसकी जिज्ञाषा के लिए काफी नहीं थे ना ही स्टार मूवीज पर आने वाले एडिटेड मूवीज । फ्रेंच किश तो आम बात है आज कल हिंदी सिनेमा में भी दिखाया जाने लगा था। राजा हिंदुस्तानी में बारिश में भीगते हुए पेड़ के नीचे करिश्मा कपूर और आमिर खान के बीच का चुम्बन दृश्य; उसे आज भी अच्मभा होता है लोगों ने उसे प्यार समझा जबकि वो सिर्फ एक औरत और मर्द के बीच का रिश्ता था।

उसके स्कूल में इंग्लिश पढ़ाने वाले फ्रेंच 'एरिक सर' ने लंच टाइम में ऑडिटोरियम में परदे के पीछे जब अपनी जीभ से उसके मुँह को और अपने हाथों से उसके शर्ट के बटन को खोला तब पहली बार उसे "फ्रेंच किश" का तजुर्बा हुआ था। अपनी पैंट की ज़िप को खोला ही था कि किसी की आहट सुन कर फ़ौरन उसे वापस बंद भी कर लिया था । आहट वाले भी उसके जैसे ही लोग थे जिनकी उत्सुकता स्कूल बंक करके 'मोर्निंग शो' देखने के बाद और बढ़ जाती है ।

तेरहवी मंजिल के अपने दो कमरे और एक हाल वाले आलीशान फ्लैट के बेडरूम की खिड़की पर कॉफ़ी का मग और ऊँगलियो में दबी हुई सिगरेट लेकर वो जाने क्या सोच रही थी । सिगरेट नशे की लत नहीं थी बल्कि सौख था उसका, निकोटीन के जहरीले धुए को अपने फेफरे में उतारने से उसे जुरेज था, सिगरेट या कॉफ़ी के पहले वो अपने गुलाबी होठों पर वेसिलीन की एक मोटी परत लगाती थी; उसके होठ काले नहीं थे।
कॉफ़ी की एक घूँट से पहले सिगरेट का एक काश लेती फिर हवा में उसके छल्ले बनाती, उसे ये सब करने में मज़ा आ रहा था जैसे छोटे बच्चे साबुन वाली पानी का बुलबुला बना कर खुश होते है । ऐसी बचकानी हरकते और बच्चो के जैसे ही खुश कभी-कभी होती है, आज भी उसका दिल बच्चो जैसा है।वो पलट के देखती है बिस्तर पर एक आदमी पड़ा हुआ, बेहोशी वाली नींद में, सोया हुआ वो बहुत मासूम लग रहा था, उसके चेहरे पे एक हल्की सी मुस्कराहट थी जैसे बीती रात से पहले वो कभी खुश नहीं हुआ था ।

क्या उससे भी किसी को ख़ुशी मिलती है, क्या वो भी किसी को मानसिक तौर पर खुश करती है। जो लोग उसके पास ख़ुशी के बहाने की तलाश में आते है वो भी कितने बेबकूफ है ख़ुशी से उसका क्या रिश्ता, उसका रिश्ता तो शरीर और उसकी कीमत से है । किसी होटल का आलीशान कमरा, फाइव कोर्स मेनू और lubricated कंडोम के साथ किसी रेपुटेड हॉस्पिटल से एच आइ वी नेगेटिव का cirtificate जो वो खुद भी साथ रखती है; अपडेटेड । नहीं वो nympho नहीं है, कभी कभी तो महीनो किसी के साथ नहीं जाती और कभी कभी महीनों किसी एक के साथ ही रह जाती । ये उसकी पसंद पे निर्भर करता था अगर आदमी उसे पसंद आ जाता तो रह जाती महीने भर के लिए भी, हाँ किसी विदेशी के साथ वो कभी नहीं जाती उनके तरीके उसे पसंद नहीं थे ।

क्रिसमस की छुट्टी में फ्रेंड के घर जाने के बहाने से वो एरिक सर के साथ एक सस्ते से होटल में गई थी जहाँ फ्रेंच किश से पहले सर ने शराब पी थी । वो शराब नहीं पीती थी शराब से उसे नफरत थी हाँ दूसरों के पीने पर उसे कोई खास आपत्ति नहीं थी । शराब पी कर लोग इमोशनल हो जाते है जो नहीं बताना चाहिए वो भी बता देते है। फ्रेंच किस के पहले और शराब पीने के बाद एरिक सर ने होटल के कमरे में बदबू वाले बिस्तर पर उसके ऊपर चढने के बाद कहा था "उनकी गर्ल फ्रेंड उन्हें नामर्द कहती है, एक ऐसा मर्द जिसकी। ताकत सिर्फ उसकी उंगलियो और जीव में होती है और सर ने पढ़ा है शराब पीने से वो असली मर्द बन सकते है " । ऐसे इमोशन का क्या काम जो गैरजरूरी वक़्त पे बेतक्कलुफ़ तरीके से बाहर आती है वैसे भी इमोशन उसे शराब से भी ज्यादा बुरी लगती । मम्मी बहुत प्रैक्टिकल थी उसे भी हमेशा यही कहती थी " इमोशन सिर्फ दुख देता है " उसने मम्मी की बात गांठ बांध ली अब उसकी जिंदगी में सिर्फ ख़ुशी है ।

वो फिर से उस लड़के को देखती है, वो अब तक सो रहा था जैसे आज से पहले कभी सोया न हो, उसने उसकी कोई cirtificate नहीं देखी, उसकी मुस्कराहट देख कर खुद भी मुस्कुरा उठती है।बीती रात से पहले उसके बेडरूम में कोई मर्द नहीं आया था। पापा के बॉस घर आये थे जब पापा काम के सिलसिले में शहर से बाहर गए थे, उसका खाना उसके कमरे में ही भिजवा दिया गया था । उसके मन का छोटा जासूस हाथ पैर मारने लगा था, डाइनिंग टेबल पर जुठे बर्तन के साथ शराब के खाली ग्लास भी पड़े थे, बॉस का डिनर सूट वोही सोफे पे पड़ा था मम्मी के बेडरूम से चूड़ी बजने की आवाज आ रही थी । पापा सुबह सुबह आ गए थे जब वो स्कूल जाने से पहले नास्ता कर रही थी आते ही मम्मी से पुछा था "डन" ?
मम्मी ने हँसते हुए कहा था "डन" । मम्मी अभी तक उसी पारदर्शी नाईटी में थी ।

उसने पारदर्शी कपड़े के उपर से गाउन पहन लिया था, ए सी की ठंडी हवा उसे कंपकंपा रही थी, गर्म कॉफ़ी पीते हुए वो बार बार उस लड़के को देख रही थी, वो लड़का उस लड़की का बॉय फ्रेंड था जो उसके दूसरे कमरे में किराये पर रहती है, किसी न्यूज़ चैनल में काम करती है, ज्यादातर रात की शिफ्ट होती है फिर भी आने जाने का समय निश्चित नहीं रहता, आज वो ऑफिस से सीधा उसके बॉस के साथ किसी होटल में जा रही है प्रमोशन के लिए उसका नाम लिस्ट में सबसे ऊपर है । उसे अचानक हंसी आ गई थी, एरिक सर की गर्ल फ्रेंड ने सच कहा था वो नामर्द थे और उस दिन सर को यकीन हो गया था शराब पीने से मर्दानगी नहीं आती । जाने से पहले सर ने उससे माफ़ी भी मांगी थी।उसके हँसने की आवाज़ से वो लड़का उठ गया था ।

तुम हँस क्यों रही हो ? पूछते हुए उसने जल्दी जल्दी कपड़े पहने थे ।
उसने उस लड़के की बात का जवाब नहीं दिया   " तुम इतनी जल्दी में क्यों हो ? "
"उसके आने से पहले निकल जाना चाहता हूँ "
"वो आज बहुत देर से आएगी, बॉस के साथ गई है "
लड़का तैयार होकर जाने लगा था "अच्छा "
फिर कब आओगे ? उसने इमोशनल सवाल पुछा था लेकिन शराब नहीं प़ी थी ।

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 871

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by priyanka om prakash on October 15, 2014 at 11:30am
Vinay kumar ji बहुत बहुत शुक्रिया समय देने के लिए ।
Comment by विनय कुमार on October 14, 2014 at 11:50pm

बहुत बढ़िया कहानी , मानव शरीर एवम मन के भूगोल की व्याख्या करती रचना | 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service