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हम जब कभी बारिश की पहली बूंद में भीगे थे
वह बात आज भी तन मन को छू कर जाती है
तो तुम्हें याद करता हूँ,तुम्हें महसूस करता हूँ
इन आँखों में तुम्हारी एक तस्वीर उभर आती है
जब तुमें मै याद करता हूँ,
तुम छोड़ हमें चाहे जाओ कितनी ही दूर
मेरी आँखों का चैन चुरा बन जाओ
किसी का नूर,
ओ हँशी,आलिंगन मुझे तुम्हारा
एहसास कराते है
कुछ लम्हे हमसफ़र के  इतने यादगार बन जाते है
जिंदगी जीने के हर साँसों से जुड़ जाते है,
उन्हें मिटाते-मिटाते कमबख्त ए
जिंदगी ही मिट जाती है,
तुम भूलाना  चाहे   भुला दिए
हमें मिटाना चाहे मिटा भी दिए
अन्धेरा कर जीवन को निकल लिए
तुम बस गए थे मेरी रूह में इस कदर की
मेरी हर धड़कन तुम्हारा एहसास कराती है
इस पल का  ख्याल  एकबार भी ना किये
मेरे कांपते होठो को कभी देखना
मेरे भीगी पलको को कभी देखाना
मेरी उन अधूरी बातो को कभी समझना
मेरे छूटते आखिरी हांथो के स्पर्श को समझना
तुम्हारी याद आती है,बेदर्द, जान पर
आ जाती  है
तुहारा एहसास कराती है

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