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दीपावली - चमकती फैलती दीपावली की रोशनी देखो

चमकती, फैलती, दीपावली की रोशनी देखो
जो फैलाई है तुमने इक नजर वो गन्दगी देखो
हमेशा दूसरों में तो निकाली हैं कमी लाखों, ...
पता चल जाएगा सच, जब कभी अपनी कमी देखो
खुशी अपनी जताने के तरीके तो हजारों हैं,
किसी की मुस्कुराती आँखों के पीछे नमी देखो
मसीहा ही समझता है हमारे दर्द के सच को
वो सबके दर्द लेकर खुश हुआ, उसकी खुशी देखो
वो कुदरत की तबाही, बेघरों के दर्द जाने है,
फरिश्ता ही मना सकता है यूँ दीपावली देखो।
^^^^^^^^^सूबे सिंह सुजान ^^^^^^^^^^^^^^^^

                      

मौलिक व अप्रकाशित

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