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तुझे वो याद करके दिल जलाती है चले आओ

तड़प कर गीत वो गम के सुनाती है चले आओ

बुलाती हैं तुझे हरदम तुम्‍हारे गॉंव की गलियॉं

तुम्‍हें वो याद करके अश्‍क बहाती है चले आओ

न भूलेगीं कभी गलियॉं शरारत याद है तेरी

कसम तुमको शरारत की दिलाती है चले आओ

जले है हाथ फिर भी सेकती रोटी तुम्‍हारी मॉं

तुम्‍हारा नाम ले ले वो बुलाती है चले आओ

न सुख मिलता यहॉं शहरी न बिजली है न बत्‍ती है

मगर खुद चॉंदनी रस्‍ता दिखाती है चले आओ

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:34pm

आपके उत्‍साहवर्धन के लिये आपको नमन आदरणीय somesh kumar जी

Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:34pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:33pm
Comment by Akhand Gahmari on March 13, 2015 at 8:32pm

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