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'''''''''''''''''चेहरे '''''''''''''''
गिरगिट का रंग का पहचानना.......
बिलकुल कठिन नहीं.....................
समंदर की गहरे नापना ...............
उसकी हलचल जान पाना ............
बड़ा ही सरल है यह सब................
बादलों की रंगत को...........................
उठने वाले तूफ़ान को.........................
आकलन कर लेना भी सरल है.............
पर कठिन है तो
किसी के चेहरे को पहचान पाना...........
उसे पढ़ पाना...............
उसे जान पाना.............
खुद में समां पाना.........
उसे समझ पाना...........
सबसे मुश्किल है...........
चेहरे की हकीकत से
रूबरू हो पाना
मुमकिन ही नहीं कभी
उन पर विश्वास कर पाना
जो बयां करते हैं
रेगिस्तानी रेत की तरह
कड़ी धूप में असहाय
खुलती बंद होती आँखों की तरह...........
चेहरे की असलियत जान पाना
असम्भव ही लगता है
नव अंकुरित बीजों की तरह.......
कितना कुछ अपने अंदर...........
छिपा कर रखते हैं....................
अपनों से................................
दूसरों से.................................
यंह तक खुद से भी.................
हंस कर बात करना.............
आंसू बहाना
सबकुछबनावटीहै
मन की बात भला कब ये सामने लाते हैं
सब खुद में ही तो रखते हैं.....
चेहरे पे कभी विश्वास न करो.....
बातों पे कभी यकीन न करो........
''साहिल वर्मा''
सा॰वि॰ विज्ञान संकाय,
बी॰एच॰यू॰
8009415280
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 24, 2015 at 12:27pm

आदरणीय आपकी बातों से मैं बिल्कुल सहमत हूँ सादर बधाई के साथ 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 24, 2015 at 11:19am

आपने सच कहा मानव्  के मनोभाव पढ़ पाना मुश्किल काम  है I

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