For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जियरा धड़के जर के पिया जी

जियरा धड़के जर के पिया जी

देखो हैं खेलत होरी पिया जी...
घेरे हैं उनको सखियाँ हमारी 
रंग हैं लगावें जम के पिया जी...
करत है लीला रास मैं जानू 
जियरा ना माने देख पिया जी...
हमरा है आँगन अब तक सूखा
मईया हैं तुलसी प्यासी पिया जी...
अईसन रंग लगाओ अबके
मन हो जाये गुलाबी पिया जी...
खेलत साईं संग ‘भरत’ रंग
खेले हैं रंग निज़ाम पिया जी...

Views: 193

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 4, 2011 at 7:49pm

भरत भाई बेहद खुबसूरत रचना है ,

अईसन रंग लगाओ अबके
मन हो जाये गुलाबी पिया जी...

प्रवाह ऐसा कि बस गुनगुनाते जाइये , बधाई इस रचना पर |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरणीय भाई तेज वीर सिंह जीआदाबकथा का वार्तालाप सिहरन पैैैदा कर गया.  कथा का नयापन ही इसे अलग…"
12 minutes ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बहुत ही साधारण सी लघुकथा है जो प्रदत्त विषय के आसपास भी नजर नहीं आ रहीl ऊपर से भाषा/वर्तनी की…"
17 minutes ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बहुत कमाल का विषय चुना है आ० तेजवीर सिंह जी, वाह! बुजुर्गों के वृद्धाश्रम जाने के अनेकों कारण…"
28 minutes ago
विमल शर्मा 'विमल' commented on विमल शर्मा 'विमल''s blog post महकता यौवन/ विमल शर्मा 'विमल'
"आदरणीय आशीष यादव जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका।"
31 minutes ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"रिश्ते भले ही खून के न हों, लेकिन कहीं-न-कहीं किन्हीं मर्यादायों से अवश्य बंधे होते हैंl इस लघुकथा…"
33 minutes ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय तेज वीर सिंह जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार."
40 minutes ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आदाब ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार. आपकी इस्लाह पर अमल करता…"
41 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।"
2 hours ago
Shyam Narain Verma replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion आयास चाहती है दोहे की सिद्धि    :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय प्रणाम, बहुत ही सुंदर तरीके से अच्छी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद l सादर"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"हार्दिक बधाई आदरणीय सालिक गणवीर जी। बेहतरीन गज़ल। आंख इतना बरस चुकी है किआंसुओं का अकाल है बाबा"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। बेहतरीन गज़ल। माटी भी उनके पाँव…"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। आपकी चिर परिचित शैली और क्लिष्ट भाषा में "मर्यादा" का…"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service