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गजल...दूर रह के हमें मिला क्या है

दूर रह के हमें मिला क्या है।
आज कहने दो कायदा क्या है।।

मौसमो की जुबनियाँ सुन लो।
कह रहा है जो वो नया क्या है।।

थाम सकता हूँ उसके दामन को।
प्यार जो हो गया बुरा क्या है।।

खिल खिलाया करो कभी खुलकर।
इश्क हो तुम मेरा हया क्या है।।

हम सभल जाए राहें उल्फत में
रोज मरने से फायदा क्या है।।

अप्रकाशित ...आमोद बिन्दौरी

Views: 449

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Comment by amod shrivastav (bindouri) on July 19, 2015 at 3:57am
Thanks jwahar sir
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 18, 2015 at 8:28am

सुन्दर प्रस्तुति!

Comment by amod shrivastav (bindouri) on July 16, 2015 at 11:04pm
2122-1212-22 है इसकी वज्न
Comment by amod shrivastav (bindouri) on July 16, 2015 at 10:58pm
जी सर अभी गजल विधा में कच्चा हु अगली बार पूर्ण तरह ठीक और पूरी गजल पोस्ट होगी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 16, 2015 at 10:53pm

आदरणीय आमोद जी बह्र या वज्न लिख दे तो हम पाठकों को रचना को समझने  में  सुविधा होगी और कम से कम पांच शेर हो तो मुक्कमल ग़ज़ल हो जाये.

कृपया ध्यान दे...

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