For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वो कहते हैं तू पत्थर है।

वो कहते हैं तू कट्टर (पत्थर) है
बहर:-1222-1222-1222-1222

नहीं मिलती तबीयत तो ,वो कहते हैं तू पत्थर है
मगर जाना नही उसने, की कितना मन समंदर है

हुई हरकत बुरी हमसे ,बदलने की जो कोशिस की
तभी मालुम हुआ हमको, खिलाड़ी तो सितमगर है

सिला अपनी मुहब्बत का,लिखा पन्ने पे जब मैंने
खुदा भी रो पड़ा बोला, धरा का तू सिकंदर है

जो मुंसिफ घर गया उनके, उधारी में दिया लेने
चिरागां हंस के बोला तब,अँधेरा तेरे अंदर है

बताओ रास्ता मुझको ,हवा पानी जरा बोलो
लुटा हूँ मैं मुहब्बत में ,मुहब्बत क्या बवंडर है

अप्रकाशित/ मौलिक
आमोद बिंदौरी

Views: 732

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 7, 2015 at 7:22am

आदरणीय , आपको हर प्रशन का जवाब मिल जायेगा और गलतियाँ भी कम हो जायेंगी अगर आप - इस लिंक मे जा कर गज़ल के विषय में दी गई जानकारियों का अध्यनयन कर लें , इसी मंच मे विस्तृत जानकारी ' गज़ल की बातें ' मे दी गई हैं , लिंक नीचे दे रहा हूँ -
http://www.openbooksonline.com/group/gazal_ki_bateyn  , दो चार बार  सभी पाठों को पढ़ लें , आप स्वयं सब समझ जायेंगे ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 6, 2015 at 4:15pm
ऐसा मोहब्बत222 मुहब्बत 122 वैसे उच्चारण तो मालुम ही है की मालूम है
Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 6, 2015 at 4:12pm
अगर गलत है तो जरूर बदलूँगा
Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 6, 2015 at 4:11pm
सर तुम को 2 गिन लेते है उसी को आधार मान मैंने मालुम22 गिना है

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 6, 2015 at 4:02pm

आ. आमोद भाई ,  सही वर्तनी शब्द की - मालूम  = 221   है , आपने- मालुम 22  ले लिया है , इसी बात की तरफ आ. मिथिलेश भाई ने इशारा किया है ॥

Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 6, 2015 at 3:10pm
आ गिरिराज सर ,आ मिथलेश सर,आ कांता दीदी आप सभी का आभार नमन

सर मैं गौर किया हूँ पर मुझे कुछ समझ नही आया कृपया प्रकाश करे क्या कमी है
Comment by kanta roy on November 4, 2015 at 9:41am

नहीं मिलती तबीयत तो ,वो कहते हैं तू पत्थर है
मगर जाना नही उसने, की कितना मन समंदर है----वाह !!! क्या खूब लिखते है आप आदरणीय आमोद जी , बहुत खूब ! पढ़कर मन आनंद हो गया। बधाई हो।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 3, 2015 at 6:26pm

आदरनीय आमोद भाई , गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाई , आ. मिथिलेश भाई जी की बात का ख़याल कीजियेगा ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 3, 2015 at 12:45pm

आदरणीय आमोद जी बह्र-ए-हजज़ को खूब निभाया है इस मिसरे //तभी मालुम हुआ हमको, खिलाड़ी तो सितमगर है// को देख लीजियेगा. बहुत बहुत बधाई . सादर

Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 2, 2015 at 2:42pm
ख़ुदा भी रो पडा बोला तज़ुर्बे तू सिकन्दर है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
4 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"चाहतें (लघुकथा) : बार-बार मना करने पर भी 'इच्छा' ने अपनी सहेली 'तमन्ना' को…"
4 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service