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गज़ल.....१२२  १२२  १२२  १२२

हमारे घरों का उजाला लिये जो.

हंसीं शशि मलाला सितारा लिये जो.

 

लड़ी गोलियों से बिना खौफ खाये

खुले आसमां का हवाला लिये जो.

 

दुआ यदि सलामत कयामत भी हारे

ये तारिख बलन्दी की माला लिये जो.

 

चुरा कर खुशी ज़िन्दगी लूट लेते-

उन्हीं से मुहब्बत–फंसाना लिये जो.

 

ये होली-दिवाली मिले ईद-सत्यम

हंसी फाग समरस तराना लिये जो.

सुखनवर....केवल प्रसाद सत्यम

 

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Comment

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 30, 2016 at 6:05pm

आ० आमोद भाई जी,  प्रणाम...उत्साहवर्धन हेतु आपका  हार्दिक आभार. सादर

Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 28, 2016 at 7:59pm
बहुत बहुत बधाई नमन
Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 28, 2016 at 7:57pm
वाह सर बेहतरीन रचना
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 28, 2016 at 5:20pm

आ० अमिता जी,  प्रणाम...आपका बहुत-बहुत हर्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 28, 2016 at 5:19pm

आ० रामबली भाई जी,  प्रणाम...आपका बहुत-बहुत हर्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 28, 2016 at 5:19pm

आ० श्याम नारायण भाई जी,  प्रणाम...आपका बहुत-बहुत हर्दिक आभार. सादर

Comment by amita tiwari on March 27, 2016 at 6:13pm

उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई

Comment by रामबली गुप्ता on March 27, 2016 at 1:14pm
वाह वाह बहुत खूब
शानदार ग़ज़ल
Comment by Shyam Narain Verma on March 25, 2016 at 4:23pm
बहुत खूब ॥ आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

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