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ग़ज़ल -डरता हूँ घर जले न कहीं इस शरर से, मैं -- ( गिरिराज भंडारी )

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तंग आ गया हूँ हालते क़ल्ब-ओ-ज़िगर से मैं

उकता गया हूँ ज़िंदगी, तेरे सफर से मैं

 

होश ओ हवास ओ-बेख़ुदी की जंग में फ़ँसे

दिल सोचने लगा है कि जाऊँ किधर से मैं

 

मंज़िल मेरी उमीद में जीती है आज भी
पर इलतिजाएँ कर न सका रहगुज़र से मैं

 

ऐसा नहीं गमों से है नाराज़गी कोई

उनकी ख़बर तो लेता हूँ शाम-ओ-सहर से मैं

 

अब नफरतों, की शक़्ल भी आतिश फिशाँ हुईं

डर है झुलस न जाऊँ कहीं इस शरर से मैं

 

जब जब हवायें तुँद हुई डर के छिप गया
उक्ता गया हूँ अब तो मियाँ हमसफ़र से मैं

***************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2017 at 11:26am

आ. अभिषेक भाई , आपका हार्दिक आभार ।

Comment by Abhishek kumar singh on January 11, 2017 at 10:14pm
वाहहहहह लाजवाब

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:25pm

आदरनीय बड़े भाई , गज़ल को आपका आशीष मिला तो गज़ल कहना सार्थक हो गया , आपका हृदय से अभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:24pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:24pm

आदरनीय धर्मेन्द्र भई , ग़ज़ल पर उपस्थिति और उत्साह वर्धन के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:23pm

आदरनीय मिथिलेश भाई , सराहना और उचित सलाह के लिये आपका हृदय से आभार । आदरणीय समर भाई जी की इस्लाह के अनुसार सुधार कर रहा हूँ । सलाह के लिये पुनः आपका ह्र्दय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:21pm

आदरणीय समर भाई , आपकी पारखी निगाहों ने सही बात पकड़ी , ये ग़ज़ल जल्दबाज़ी मे ही पोस्ट की थी कुछ कारण वश । आपकी इस्लाह शानदार है , सुधार कर रहा हूँ । समय से इस्लाह के लिये आपका हृदय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:18pm

आदरणीय दिनेश भाई , सराहना के लिये आपका आभार , आपका कहना दुरुस्त है , सुधार कर रहा हूँ , आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:17pm

आदरनीय आशुतोष भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 11, 2017 at 9:17pm

आदरनीय आशुतोष भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।

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