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सवालों का पंछी सताता बहुत है-गीत

मुझे रात भर ये भगाता बहुत है
सवालों का पंछी सताता बहुत है

कभी भूख से बिलबिलाता ये आये
कभी आँख पानी भरी ले के आये

कभी खूँ से लथपथ लुटी आबरू बन
तो आये कभी मेनका खूबरू बन

धड़कन को मेरी थकाता बहुत है
सवालों का पंछी सताता बहुत है।।1।।

कभी युद्ध की खुद वकालत करे ये
अचानक शहीदों की बेवा बने ये

कभी गर्भ अनचाहा कचरे में बनकर
मिले है कभी भ्रूण कन्या का बनकर

निगाहों को मेरी रुलाता बहुत है
सवालों का पंछी सताता बहुत है।।2।।

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