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नफ़स की धुन नही थमीं...


हजज़ मुरब्बा मक़बूज
अरकान :-  मुफाइलुन मुफाइलुन (1212-1212)

मुझे  उसी  से प्यार हो ।।
जो तीर दिल के पार हो ।।

पहाड़ जैसी' जिंदगी ।
कोई तो दाबे'दार हो।।

सवाल  बस मेरा यही ।
अदब ओ ऐतबार हो।।(शिष्टाचार,विश्वास)

नफ़स की  धुन नहीं थमें।(आत्मा,soul)
कोई भी कितना यार हो।।

लुग़त* की  छेड़छाड़ में। (शब्दकोश)
  हुसूल* दाग़दार हो।।(परिणाम,फल)

उसूल दिल का ये कहे ।(नियम, कायदा)
मिलावटी न प्यार हो।।

मेरी रिसाल-ए- इश्क में ।
वो  रौशनाइगार हो ।।

आमोद बिंदौरी/ मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on April 29, 2019 at 5:57pm

जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,अच्छा प्रयास है,बधाई ।

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