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आई थी सूचना गाँव में

बीते मास तेहरवीं तारीख़
तीन बजे अपरान्ह में
आई थी सूचना गाँव में
कि गाँव का होरी जो दिवाली पर आने को था
अब कभी नहीं आएगा
कि अपनी सरहद के काफी भीतर
कोई बड़ी राष्ट्रीय शरारत हो गई थी
फ़ौजी होरी की शहादत हो गई थी
आई थी सूचना गाँव में
कि
गाँव का होरी जो दिवाली पर आने को था
वह अब कभी भी नहीं आएगा
वह तिरंगे के लिए जान दे गया था
इसलिए तिरंगे में ले आया जाएगा
गाँव ने सूचना सुन ली थी पर पचा नहीं पाया था
गाँव पहेली हो गया था सुलझा नहीं पाया था
प्रश्न उबल रहा था मगर उत्तर मौन था
युद्ध जो नहीं था तो मारने वाला कौन था
किसी अख़बार ने किसी इश्तिहार ने
किसी भी चीख़ ने किसी भी पुकार ने
नहीं कहा था युद्ध
या गाँव बहरा हो गया था
राज़ था खुले आम कोई
जो और गहरा हो गया था
कि युद्ध हुआ था अथवा नहीं हुआ था
हुआ था तो कहाँ किस के लिए हुआ था
प्रश्न उबल रहा था मगर उत्तर मौन था
होरी मरा था तो मारने वाला कौन था
सरहद की सरहद थी तो फिर सीमा कहाँ थी
सीमा कब लांघी गई सीमा कहाँ -कहाँ थी
सीमा के आर - पार कौन कौन कौन था
प्रश्न उबल रहा था मगर उत्तर मौन था
कि
युद्ध घोषित हुआ नहीं तो
कैसे घोषित हो गए शहीद
होरी ,पंसेरी और फैनी फरीद
सूचना ने होरी का मरना बताया था
तो माटी से माटी मिलान निश्चित होना ही था
शहादत या शरारत थी रस्मों को ढोना ही था
तो सब कुछ होना ही था जैसे हो पाता है
सधवा सा रंग ढंग विधवा हो जाता है
तभी अचानक उछली फिर एक सूचना
कि पूर्वस्थिति बहाल हो गई है
कि स्थिति है कि कमाल हो गई है
सिदूर पोंछते चूड़ियाँ तोड़ते
पिंड श्मशान का सामान जोड़ते
रुक गए हाथ
सूचना सरकारी थी बेहद ज़रूरी थी
सच सच मानना अब भी मजबूरी थी
पूर्वस्थिति बहाल कहा तो हुई ही होगी
ठंडी क्या राख ऐसे ही हुई होगी
प्रश्न फिर उबले थे उत्तर अब भी मौन थे
जिनकी बहाल हुई वो लोग कौन थे ???
--------------
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Samar kabeer on July 19, 2019 at 10:55am

मुहतरमा अमिता जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by pratibha pande on July 16, 2019 at 9:42am
प्रश्न उबल रहा था मगर उत्तर मौन था
कि
युद्ध घोषित हुआ नहीं तो
कैसे घोषित हो गए शहीद
होरी ,पंसेरी और फैनी फरीद// सीमा पर सालों से जारी छद्म युद्ध पर बहुत गहन रचना हार्दिक बधाई आदरणीया अमिता जी

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