For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरा बचपन का दोस्त कबीर इस बार तीन साल बाद दुबई से ईद मनाने खास तौर पर अपने देश आया था। मुझे  खाने पर बुलाया था। तीन साल पहले वह  आया था तो नया मकान बनवाया था। मैं उस समय देश से बाहर था तो नहीं जा पाया था। इस बार तो जाना ही था। दोस्तों से सुना था कि खूब कमाई कर रहा है दुबई में।

शाम को कुछ मिष्ठान, चॉकलेट और गुलाब के फूलों  का  गुलदस्ता लेकर खोजते पूछते पहुंचा तो घर का बाहरी आवरण देख कर बड़ी निराशा हाथ लगी।घर की बाहरी दीवार पर सीमेंट भी नहीं था।पानी की निकासी की  नाली  में बिजली का पोल गढ़ा हुआ था।  गली इतनी तंग थी कि गाड़ी खड़ी करने को भी जगह नहीं थी। ऐसा पैसा कमाना किस काम का।

लेकिन जब घर के अंदर गया तो मेरी आँखें फटी रह गयीं।बड़े बड़े कमरे पूर्ण रूप से सुसज्जित।हर कमरे में बड़े वाले टी वी,ए सी, शानदार कालीन बिछे हुए, मंहंगे सोफ़ासेट, दीवारों पर कीमती ऑयल पेंटिंग्स और  रेशमी पर्दे।बाहर से कोई अनुमान ही नहीं लगा सकता कि अंदर से यह मकान इतना भव्य और  आलीशान होगा।

इस विरोधाभाष पर मुझसे चुप नहीं रहा गया,"यार कबीर,थोड़ा पैसा घर के बाहरी हिस्से पर भी खर्च कर दे।"

"नहीं भाई, यह तो मैंने जान बूझकर ही नहीं किया।"

"कोई विशेष कारण?"

"हाँ मित्र,कुछ कारण भी थे।"

"क्या मैं जान सकता हूँ?"

"क्यों नहीं मित्र? तू तो मेरा जिगरी दोस्त है।"

"तो बता दे यार?"

" जब यह मकान बनवाया था तो मैंने इस बिजली के पोल को नाली से बाहर हटाने की अर्ज़ी दी थी। उन्होंने जो खर्चा लिखकर दिया था वह भी जमा करा दिया। लेकिन तीन साल बाद भी यह पोल वहीं का वहीं है।"

"यार फिर आगे कोई कार्यवाही नहीं की।"

"सब कुछ कर लिया।"

"थोड़ी मेहनत और कर लेता।"

"नहीं भाई, अब कुछ नहीं करूंगा|"

"ऐसा क्यों?"

"यार वैसे भी बाहरी दिखावा और तड़क भड़क, हम लोगों के लिये अकसर  कोई ना कोई मुसीबत ही लाता है।

 मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 415

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on August 25, 2019 at 5:00pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।

Comment by Samar kabeer on August 25, 2019 at 11:48am

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
36 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
2 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
2 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
2 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
8 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
8 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service