For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हम जिंदगी से क्या चाहते हैं
-----------------------
हम खुद नहीं जानते
हम जिंदगी से क्या चाहते हैं
कुछ कर गुजरने की चाहत मन में लिए
अधूरी चाहतों में जिए जाते हैं

उभरती हैं जब मन में
लीक से हटकर ,कुछ कर गुजरने की चाह
संस्कारों की लोरी दे कर
उस चाहत को सुलाए जाते हैं

सुनहली धुप से भरा आसमान सामने हैं
मन के बंद अँधेरे कमरे में सिमटे जाते हैं

चाहते हैं ज़िन्दगी में सागर सा विस्तार
हकीकत में कूप दादुर सा जिए जाते हैं

चाहते हैं ज़िन्दगी में दरिया सी रवानी
और अश्क आँखों में जज़्ब किये जाते हैं

चाहते हैं जीत लें ज़िन्दगी की दौढ़
और बैसाखियों के सहारे चले जाते हैं

कुछ कर गुजरने की चाहत
कुछ न कर पाने की कसक
अजीब कशमकश में
ज़िंदगी जिए जाते हैं

हम खुद नहीं जानते
हम ज़िन्दगी से क्या चाहते हैं

Views: 497

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Raju on April 16, 2010 at 4:29pm
Rajni Didi Pranaam ...

Aapki ye kavita bahut hi achhi hai ... hum sab ko aapki aur v rachnao ka intezaar rahega
Comment by BIJAY PATHAK on April 14, 2010 at 1:45pm
Adarniya Rajni ji,
Jiwan ki sachai ko itne sunder kavita ke madhyam se likhne ke liye dhanyabad,
कुछ कर गुजरने की चाहत
कुछ न कर पाने की कसक
अजीब कशमकश में
ज़िंदगी जिए जाते हैं
Bahut khub
Comment by amit on April 12, 2010 at 8:56pm
ye bahut hi achi rachna hai aur isme jivan ki sachi bat batayi gayi hai
Comment by Sanjay Kumar Singh on April 11, 2010 at 5:18pm
Bahut badhiya rachna hai, jindgi ki sachaai,aur anubhaw ka samawesh ees kavita mey dikhta hai, Sundar ban padaa hai,
Comment by Admin on April 11, 2010 at 2:48pm
चाहते हैं ज़िन्दगी में सागर सा विस्तार
हकीकत में कूप दादुर सा जिए जाते हैं


आदरणीया रजनी जी ,प्रणाम ,सर्वप्रथम मै आपको प्रथम ब्लॉग ओपन बुक्स पर लिखने के लिये धन्यबाद देता हू, आपने बहुत ही अच्छी कविता लिखा है, ये सही है की अगर आप समंदर को अपने अन्दर छुपा लेना चाहते है तो आपका ह्रदय भी समुन्दर सा विशाल होना चाहिये , सपना देखना अच्छी बात है किन्तु उस सपना को पूरा करने हेतु प्रयत्न भी करना चाहिये,इस कविता का एक एक लाइन ज्ञानवर्धक और संदेशो से भरा हुआ है, बहुत अच्छी रचना,
आपके अगले ब्लॉग के इंतजार मे
Admin
OBO

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 11, 2010 at 1:33pm
उभरती हैं जब मन में
लीक से हटकर ,कुछ कर गुजरने की चाह
संस्कारों की लोरी दे कर
उस चाहत को सुलाए जाते हैं

रजनी दीदी सबसे पहले तो आपके द्वारा लिखे गये इस साईट पर पहले ब्लॉग के लिये आपको बहुत बहुत धन्यबाद, आप की कविता का एक एक लाइन बिलकुल यथार्थ से जुडे हुवे है, अगर परंपरा से हट कर कोई काम, कोई ब्यवसाय अगर करने की कोशिश किया जाता है तो रुढ़िवादी शक्तिया बराबर बिरोध करती रहती है, पर संघर्ष का नाम ही तो जिन्दगी है, जो लोग इन शक्तियों का सामना किया और इनसे नहीं डरा वो ही कुछ करते है और आगे बढते है, कहा गया है न की डर के आगे जीत है,
दीदी आपने बहुत ही खुबसूरत और अर्थ से परिपूर्ण रचना लिखा है, बहुत बढ़िया, आप के अगले पोस्ट का बेसब्री से इन्तजार रहेगा,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 11, 2010 at 1:08pm
bahut badhiya rachna hai rajni didi.....
कुछ कर गुजरने की चाहत
कुछ न कर पाने की कसक
अजीब कशमकश में
ज़िंदगी जिए जाते हैं
dhanybaad didi yahan humlogo ke beech itni acchhi rachna post karne ke liye........
aapke aur bhi rachnaon ka intezaar rahega...

preetam tiwary

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service