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मै तो एक पागल कवि हूँ

                                                        मै  तो एक पागल  कवि हूँ
क्या फर्क पड़ता है 
मै तो एक पागल कवि हूँ 
तम को काटता रवि हूँ
कौन किसलिए जीता है 
कौन किसलिए पीता है 
ज़िन्दगी तो सीता है 
कर्मो की गीता है 
भाग्य विपरीता है 
यहाँ तो हर कोई 
बस अपने लिए जीता है  
मै तो राम की सीता हूँ 
गीतों की गीता हूँ 
पर…
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Posted on March 5, 2011 at 11:43pm — 3 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 11:49am on September 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:19am on September 16, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 11:17pm on April 11, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अरविन्द साहिब आपने अपनी रचना "चित्र से कविता तक" प्रतियोगिता के टिप्पणी बॉक्स में पोस्ट किया है जबकि आपको ब्लॉग section में करना चाहिए था, प्रतियोगिता हेतु बॉक्स १६ से खुलेगा जहा दिए गए चित्र पर आधारित रचना प्रस्तुत की जाएगी |

ब्लॉग में पोस्ट करने हेतु मुख्य पृष्ठ के TAB से ब्लॉग अथवा ब्लॉग section से Add a blog post को क्लिक कर पोस्ट की जा सकती है |

फिर भी समस्या कोई हो तो बताये |

कृपया |

At 3:44pm on March 7, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 5:15pm on March 6, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:17pm on March 5, 2011, Admin said…
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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