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बाबूजी सिखवलेs दुःख, सहीहs अपार ,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,
गलती ना करिह अइसन,पिटे पड़े कपारs,
दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई प्यारs ,

बड़ा ही आसान होला, दिल के दुखावल,
दोसरा के कईलाs में, गलती निकालल ,
अपना पे जब पड़ी जाला,धुनेs लोगवा कपारs,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,

दिल के तू भोला बाड़s, सीधा तोहार जीवन,
चिकन चिकन मीठ बोली, लागे तोहके नीमन,
नाही पहिचनलs उनके, बाड़न बड़ कलाकारs,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,

अइसन उ घात कईलन , प्यार के उपहास कईलन,
धन के भी हाँस कईलन, विश्वास के नाश कईलन,
देखs उनका मन मे कईसन, भरल अहंकाsर ,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,

बाबूजी सिखवलेs दुःख, सहीहs अपार ,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,
गलती ना करिह अइसन,पिटे पड़े कपारs,
दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई प्यारs ,

******************************************

हमार पिछुलका पोस्ट => भोजपुरी ग़ज़ल (गनेश जी बागी)

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Replies to This Discussion

बाबूजी सिखवलेs दुःख, सहीहs अपार ,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,
गलती ना करिह अइसन,पिटे पड़े कपारs,
दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई प्यारs ,

jai ho ganesh ji
Bahut badhiya Ganesh ji
बाबूजी सिखवलेs दुःख, सहीहs अपार ,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,
गलती ना करिह अइसन,पिटे पड़े कपारs,
दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई प्यारs ,

बहुत सही लिखले बनी गणेश भैया....ई पढ़ के पापा के बात याद आवाट बा,पापा हमार सिखैब
हमेशा हमरा के की कब्बो ऐसन काम मत करिहा जेकरा कारण केहु के सामने नज़र झुका के जाए के परो...
बात सही बा हमेशा सबसे मिल जुल के रहे के चाही..जहाँ तक होखो दुश्मन से भी गले लगवे के चाही..अब बिच्छू के त काम ही दसल हा ता ओकरा के केटना भी हाथ पर लेके बचाई वो क़ाटबे करी....एहसे अपना से ग़लत ना करे के सामने वाला के हर हद तक सम्झवे के चाही और जब जब वो ना मानी तब देखल जाई...
और ई बात ता एकदम सही बा कि दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई प्यारs ,....

bahut hi badhiya...jaayi jhaar ke..likhat rahi
बाबूजी सिखवलेs दुःख, सहीहs अपार ,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,
गलती ना करिह अइसन,पिटे पड़े कपारs,
दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई प्यारs ,

बड़ा ही आसान होला, दिल के दुखावल,
दोसरा के कईलाs में, गलती निकालल ,
अपना पे जब पड़ी जाला,धुनेs लोगवा कपारs,
कबो ना करिहs बबुआs, केकरो प वारs ,

बाबूजी अइसने होखिले । गणेश जी, राउर कविता पढ़ के मन अपना लइकाईं के दिन में पहुँच गइल जब पापा के संगे-संगे लागल रहत रहनी । पापा हर बात के समझावे खातिर कुछ ना कुछ उदाहरण जरूर देत रहनी आ एह उदाहरण में सबसे अधिका रामायण के कथा के उदाहरण रहत रहे । बहुत बढ़िया लिखले बानी ।

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