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प्रदीप नील वसिष्ठ's Discussions (274)

Discussions Replied To (273) Replies Latest Activity

"घमंड ? कितनी गलतफहमियां पाल कर रखता है ,इंसान। मगर यह मिट्टी ही है जो मुस्कुराती रहत…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"// "ठीक हैं भाई यह आदमी ही कर सकता हैं, उल्लास के रंगो से झगडा." // सच कहा आपने गौड़…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"जीवन इसी का नाम है ,जाने कितनी मधुर यादें हृदय की गहराइयों में छुपी रहती हैं। आपने उ…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"अरे वाह ! कथा के अंत ने तो हिला ही डाला। ज़ोर का झटका धीरे से नहीं बल्कि जोर से ही लग…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
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"भाई सुनील , आपकी इस रचना में बहस का जो सार्थक अंत हुआ है , काबिले-तारीफ है। // इंसान…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"तेजवीर जी , आपके कथ्य और शिल्प का कायल रहा हूँ मगर आज कथा शुरू में कुछ लडखडाती सी लग…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"अति उत्तम सोच ,रश्मि जी। आपकी रचना आश्वस्त करती है कि सविताओं के बेटे बड़े होंगे तो द…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"जी नेहा , ऐसी ही तो होती है हर एक मां। बच्चे को नहीं बल्कि खुद को सजा देती हुई। ये स…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"कितनी जल्दी दिन ढलता है ,सविता जी। चेतन कितना बदल गया। इस चमक-दमक भरे रास्ते पर जो फ…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"// मैं भी आपकी तरह मेम बनकर घर पर बैठेगी //  इस एक पंक्ति में लाखों शांता बाइयों का…"

प्रदीप नील वसिष्ठ replied Jan 30, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
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२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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