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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Discussions (4,212)

Discussions Replied To (2730) Replies Latest Activity

"बहुत बढ़िया लगी मन को छुई भाईजी, बधाई स्वीकार अनुग्रहित करे  बस सरीर भर के लिए पिलाय…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 27, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"एक साथ दो महानुभावों की गजल एक ही बात अलग अलग स्वर में मिल रही है, सौरभ जी और अम्बरी…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 27, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"सौ हजों का सिला ख़ाक हो जाएगा) मुफलिसों को कभी ना रुलाया करो ७------इससे उम्दा पैगाम…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 27, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"दिल से नफ़रत के काँटे हटाकर ज़रा, गुल मुहब्बत के “सूरज” खिलाया करो॥  बहुत खूब आदरणीय ड…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 27, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"जिनके चेहरे पर सिलवट तजुर्बे की है, उनके आगे सर झुकाया करो -  बहुत बढ़िया बात, शुक्र…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 27, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"आज 'अम्बर' जमीं मिल रहे हैं जहाँ चल बसें हम वहीं यूं निभाया करो ------बेहद पसंद आई भ…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 26, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"मैं भी तुमको परेशां करूँ  रात दिन, तुम भी मुझको बराबर सताया करो |  ----बहुत ही उम्दा…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 26, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"ऑंख देखे को सच मानकर इस तरह,"उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो"। आदरणीय तिलक साहब सादर…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 26, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"खुद-ब-खुद  मेरी  किसमत  संवर  जाएगी lतुम  जो  हर  रोज़  "गुलशन"  में  आया  करो ll बह…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 26, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६

1138 Aug 28, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"प्रिय श्री रवि प्रभाकर भाई आपकी रचना (लघुकथा) ’बहु-बेटी’ के ’हमारा मेट्रो’ में प्रका…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Aug 19, 2012 to एक घोषणा :- प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र "हमारा मेट्रो" आपकी रचनाओं को नियमित प्रकाशित करेगी...

131 Nov 25, 2013
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
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Jul 10

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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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