For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इमरान खान's Discussions (790)

Discussions Replied To (588) Replies Latest Activity

"अजीत साहब आपको प्रतीक, बिम्ब अच्छे लगे... जानकर तसल्ली हुई... बहुत शुक्रिया "

इमरान खान replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"दिनेश कुमार जी शुक्रिया आपका"

इमरान खान replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"बहुत शुक्रिया मिथिलेश जी.... आपको मतला अद्भुत लगा... सुनकर सुकून पहुंचा..."

इमरान खान replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"शुक्रिया मनोज साहब... अपनी इस्लाह से नवाजें..."

इमरान खान replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"खस्ता दीवारों से गिरता है पलस्तर देखो, कितनी सीलन से भरा है ये दिली घर देखो.   घौंसल…"

इमरान खान replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"बहुत ही शानदार.. मेरा खुद का भी तजुर्बा है जब इन्सान किसी उपलब्धि को पा लेता है तो व…"

इमरान खान replied Jul 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-4 (विषय: बुनियाद)

1356 Jul 31, 2015
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

"चंद्रेश जी ये सही है कि नींव के पत्थर को कुछ नहीं मिलता लेकिन सपना सच होना भी कोई छो…"

इमरान खान replied Jul 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-4 (विषय: बुनियाद)

1356 Jul 31, 2015
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

"सही कहा अपने विनय जी... मुश्किल तो है नींव का पत्थर बनकर रहना, मगर ऐसे कुछ तो लोग हो…"

इमरान खान replied Jul 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-4 (विषय: बुनियाद)

1356 Jul 31, 2015
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

"वि प्रभाकर जी, आपकी टिपण्णी से दिल को तसल्ली मिली। आपके मार्गदर्शन का आकांक्षी हूँ।…"

इमरान खान replied Jul 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-4 (विषय: बुनियाद)

1356 Jul 31, 2015
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

"नीता जी, जब मन परेशान होता है बड़े ही तसल्ली देते हैं। आपको मेरा ख्याल पसंद आया शुक्र…"

इमरान खान replied Jul 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-4 (विषय: बुनियाद)

1356 Jul 31, 2015
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
10 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service