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"//उसकी कशिश, तिलिस्‍म कहूँ, और क्‍या कहूँ लौटा है जि़स्‍म दर से मगर दिल ठहर गया। मु…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 29, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २७ (Now Closed)

719 Sep 30, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"उड़ने का वो जुनून गया वो हुनर गया ये झूठ है कि वक़्त मेरे पर क़तर गया (१)             …"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 29, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २७ (Now Closed)

719 Sep 30, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"ग़ज़लदोनों पसार हाथ सिकंदर पसर गयापानी के बुलबुले की तरह हर बशर गया.फलदार बन के छाँव…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 29, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २७ (Now Closed)

719 Sep 30, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

मुख्य प्रबंधक

"आदरणीय अग्रज उमाशंकर मिश्र जी, इस समाचार को अखबारों में देकर आपने अत्यन्त सराहनीय का…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 15, 2012 to "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता समाचार पत्रों में

14 Sep 22, 2012
Reply by UMASHANKER MISHRA

"आदरेया डॉ० प्राची जी, सभी रूपमाला छंद भाव व शिल्प के स्तर पर बेहतरीन हैं ......इन्हे…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 9, 2012 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक २३ (Now Closed)

835 Sep 9, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"मित्र सुशील जी, इस ओजपूर्ण अभिव्यक्ति  के लिए  बहुत बहुत बधाई !"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 9, 2012 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक २३ (Now Closed)

835 Sep 9, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"आदरणीय लक्ष्मण जी, छंद पर रामराज्य की कल्पना अद्भुत है .....कृपया शिल्प को ठीक से सम…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 9, 2012 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक २३ (Now Closed)

835 Sep 9, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"रेखा जी ! हाइकू व एकादशी में फर्क है..... कृपया इसकी सटीक जानकारी लेकर ही अभ्यास करे…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 9, 2012 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक २३ (Now Closed)

835 Sep 9, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"वन्दना जी, सुन्दर रचना के लिये बहुत बहुत बधाई ! साथ-साथ आदरणीय योग़राज जी का भी हार्…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 9, 2012 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक २३ (Now Closed)

835 Sep 9, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"//जहाँ रोटी हो कपडा हो और रहने को अपना मकान हो, ऐसा भारत बनाये हम जिसका पुरे जगत में…"

Er. Ambarish Srivastava replied Sep 9, 2012 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक २३ (Now Closed)

835 Sep 9, 2012
Reply by Er. Ambarish Srivastava

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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