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दिगंबर नासवा's Discussions (471)

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"शहर में जुल्म हुआ किस तरह से दीपों पर'इक आफताब के बेवक्त डूब जाने से' .. गज़ब का शेर…"

दिगंबर नासवा replied Oct 30, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-40

808 Oct 31, 2013
Reply by सन्दीप सिंह सिद्धू "बशर"

प्रधान संपादक

"प्रशंसनीय निर्णय है ... ये एक महत्वपूर्ण निर्णय है जो साहित्य के प्रचार प्रसार में द…"

दिगंबर नासवा replied Apr 3, 2012 to एक महत्वपूर्ण घोषणा

42 Apr 23, 2012
Reply by AVINASH S BAGDE

प्रधान संपादक

"ओ बी ओ  के दो वर्ष पूरे होने पे सभी टीम मेंबर और पढ़ने वालों को बहुत बहुत बधाई ... मं…"

दिगंबर नासवा replied Apr 3, 2012 to दो शब्द - ओबीओ की दूसरी वर्षगांठ पर

43 Apr 5, 2012
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"उस्तादों वाली बात बस उस्ताद ही कर सकते हैं ... बहुत कुछ सीखने को मिल जाता है आपकी बा…"

दिगंबर नासवा replied Jan 30, 2012 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - १९

627 Jan 30, 2012
Reply by अरुण कुमार निगम

प्रधान संपादक

"इतनी सारी भांग एक साथ पिला जी योग राज जी .... और वो भी होली के दिन ... आज तो दुबारा…"

दिगंबर नासवा replied Mar 20, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ में शामिल सभी रचनाएँ एक साथ

9 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"कमाल का मुशायरा और बहुत ही लाजवाब रिपोर्ट और उससे भी ज़्यादा .... मस्ती की तरंग ....…"

दिगंबर नासवा replied Mar 20, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ (रपट)

30 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"Bahut khoob ... Is gazal ke bina"

दिगंबर नासवा replied Mar 20, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ (रपट)

30 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"पी रहा तू जिस तरह खुल्ले में दारू रोज़ ही, नाम प्रीतम से तेरा फिर बेवडा हो जाएगा ...…"

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"बस समझ लो आखरी बोल पर बोल्ड हो गये ... नही तो मामा बन ही जाते ... SHUKRIYA ..."

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"दस अगर मिल खेल ले जितना सचिन है खेलता, इंडिया की जीत का फिर सिलसिला हो जायेगा,   TEA…"

दिगंबर नासवा replied Mar 16, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-९ ( Now Closed )

641 Mar 17, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

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Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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