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योगराज प्रभाकर's Discussions (10,563)

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"//उनकी याद ना छन भर बिसरे ।दो अँखियों का कजरा पसरे ।// बहुत खूब, प्रदत्त विषय पर सु…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ आदरणीय समर कबीर साहिब। कम से कम वरिष्ठ सदस्यों को ऐसी…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"कृपया यह आलेख अवश्य पढ़ें आदरणीय: http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"//मिट्टी की सोंधी महक उठी। डाली पर चिड़िया चहक उठी॥// . "उठी उठी" से अंत किया है, "लघ…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"बहुत उम्दा राजनैतिक व्यंग्य है। इस उम्दा अतुकांत कविता पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"वाह वाह वाह, अति सुंदर, सरस और प्रभावशाली दोहावली हुई है भाई अजय गुप्ता, हार्दिक बधा…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"//कागजी नाव रिमझिम बारिश बच्चों का चाव// कितना मासूम सा हाइकु है, वाह वाह वाह ! बाक…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"सावन के विभिन्न आयामों को छूती हुई आपकी यह अतुकांत कविता अति सुंदर एवं विषयानुकूल हु…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"अति सुंदर एवं विषयानुकूल दोहावली रची है डॉ छोटेलाल सिंह जी। विरह की छोंक से अभिव्यक्…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 11, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

"सावन की आमद में विरह की वेदना से भीगा बेहद उम्दा गीत रचा है आदरणीय वासुदेव अग्रवाल न…"

योगराज प्रभाकर replied Aug 10, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94

303 Aug 11, 2018
Reply by Samar kabeer

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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Sushil Sarna posted a blog post

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