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अजय गुप्ता 'अजेय's Discussions (1,481)

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"ख़ुशफ़हमी है कि इन्सा सयाना बहुत हुआ बर्बर है आज भी कि फ़साना बहुत हुआ . अपनों को नाग़…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"अनीस भाई, गज़ल ने मन मोह लिया। कुछ बहुत संजीदा और कुछ हल्के-फुल्के विनोदी स्वभाव के श…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। जो गुणीजनों की राय है, उसके बाद हमारा कुछ कहना सूरज के स…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"भाई अजित जी, अहा अहा। क्या शेर। एक से बढ़कर एक।  बहुत सुन्दर गज़ल कही आपने।"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"भाई नाकाम जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। जो गुणीजनों की राय है, उसके बाद हमारा कुछ…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"भाई तस्दीक़ जी,बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। जो गुणीजनों की राय है, उसके बाद हमारा कुछ…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"भाई सालिक जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। जो गुणीजनों की राय है, उसके बाद हमारा कुछ…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 23, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"भाई लक्ष्मण जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। जो गुणीजनों की राय है, उसके बाद हमारा कु…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 22, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"भाई नादिर जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। जो गुणीजनों की राय है, उसके बाद हमारा कुछ…"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 22, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

"आदरणय मुनीश जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है। सादर"

अजय गुप्ता 'अजेय replied May 22, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119

417 May 24, 2020
Reply by नादिर ख़ान

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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22 hours ago
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दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
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"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
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