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kanta roy's Discussions (2,219)

Discussions Replied To (1839) Replies Latest Activity

"खंजर के विविध आयामों को शब्दों में बाँध ,बहुत ही शानदार प्रस्तुति हुई है आपकी आदरणीय…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सेंध लगाकर, भेद जानकर क्रय-विक्रय का खेल घर के ही अन्दर देशद्रोही से ख़ंजर।------- व…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आपने अपनी इस कविता माध्यम से हमारे परिवेश के समस्त विसंगतियों को बहुत ही मर्मस्पर्शी…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"इतने गम्भीर विषय पर आपने बडी़ ही कुशलता से सकारात्मक " खंजर " को अभिव्यक्त किया है ।…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वे जो पैर पड़ते हैं पैर उखाड़नें के लिये ------- लाजवाब पंक्तियों से संदर्भित यह खंज…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वाह !!!! क्या खूब दास्तान ऐ खंजर हुआ है । गजल पढकर बहुत मजा आया है । बधाई कबूल फरमाई…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वो पीठ का खंजर याद आया चलते -चलते कदम ठिठके फिर वो फ़साना याद आया छाती पर खुदे दरख्…"

kanta roy replied Jan 8, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-63

466 Jan 10, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बेहतरीन विविध सार्थक प्रश्नों के गुलदस्तों से सजी हुई यह वार्ता हम सबको आज हर्षोल्‍ल…"

kanta roy replied Jan 6, 2016 to लघुकथा विधा पर योगराज प्रभाकर जी से बातचीत

27 Jul 19, 2016
Reply by योगराज प्रभाकर

"पिता की क्षति अपूर्णनीय है । विनम्र श्रद्धांजलि !"

kanta roy replied Jan 5, 2016 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

प्रधान संपादक

"हम सब लघुकथाकारों के भ्रमित होने से बचने के लिए सही समय पर ,  मार्गदर्शन हेतु  बेहद…"

kanta roy replied Jan 4, 2016 to लघुकथा में कालखंड दोष

28 Feb 8, 2016
Reply by योगराज प्रभाकर

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Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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