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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Discussions (4,212)

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"सुंदर और सार्थक कुण्डलिया  छंद रचे है आद डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी | हार्दिक बधा…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"डोर कच्ची है या तुम्हारी पकड़? कच्ची है तो बनाई किसने ? तुमने ही न ? कभी सोचा ...  वो…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"सृष्टि सृजन के धागे से, आज बंधे सब लोग । सब मिलते हैं प्यार से, करते जीवन योग  ॥----…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"जो है वो दिखता नहीं और नहीं है वहाँ खोज लेते हैं हम दोनों जगह ग़लत हैं |  -  सुंदर और…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"मासूम हजारों फँस जाते, अतृप्त इच्छा की डोर में।   इनकी चीखें कौन सुनें इस, वेलेंटाइन…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"क्या उसे मालूम नहीं ?इन पल्लों की केंकती आवाज़अधिक तीखी लगती है आजकल.----------------…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
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"धागे से वस्त्र , आवरण , माँ का आँचल ,आँचल की छाँव , सुवास ही सुवास |भाई , बहन , राखी…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"रखना इसे संभाल ये है प्रीत की डोर | ----   चाहे कितनी भी ऊँगली उठे तेरी ओर  रखना इसे…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"कभी न ओझल  होती और  कभी न मिटती डोर से मन के बंधन का खुबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

"दूसरी रचना (प्रेम का इजहार)   मज़बूरी मे ढूंढी जब नौकरी स्नातक करना रहा अधूरा, फिर गु…"

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied Feb 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-52

901 Feb 14, 2015
Reply by maharshi tripathi

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दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
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"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
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"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
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