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आदरणीय साहित्य प्रेमियो,


जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

विषय : "दिल की बात"

आयोजन 14 फरवरी 2026, दिन शनिवार से 15 फरवरी 2026, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.
ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन 'घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो 14 फरवरी 2026, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

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मंच संचालक

मिथिलेश वामनकर
(सदस्य टीम प्रबंधन)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

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स्वागतम

सादर अभिवादन।

गजल
*****
करता है कौन दिल से भला दिल की बात अब
बनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।
*
इक दौर वो था  प्रेम  की  रंगत  थी रूह तक
तन की हवस है देती दबा दिल की बात अब ।२।
*
होती कभी थी इससे  ही  रोशन ये जिन्दगी
पर क्यों हुई है दीप बुझा दिल की बात अब ।३।
*
मतलब परस्त मोह जो कहता है " प्रेम हूँ "
कैसे बनेगी बोल दुआ दिल की बात अब।४।
*
छुप-छुप के अश्क आँखों में देती तो हैं मगर,
पाती न दिल को एक हँसा दिल की बात अब ।५।
*
बीरानी  अब  अजीब  सी   रिश्तों  के  शह्र में
सुनता है कौन किसकी ज़रा दिल की बात अब।६।
*
सबने ही ओढ़ आज ली फितरत फरेब की
लाये कहाँ है बोल हवा दिल की बात अब।७।
*
दिखते भले ही खुश हो 'मुसाफिर' को दोष दे
तुमको मगर है खूब पता दिल की बात अब।८।
*
मौलिक/अप्रकाशित

आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक  बधाई!

आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।

दोहा एकादश. . . . . दिल

दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात ।
बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में रात।।

दिल से दिल की हो गई, दिल ही दिल में बात ।
दिल तड़पा दिल के लिए, मचल गए जज़्बात ।

दिल में दिल की जीत है, दिल में दिल की हार ।
हर क्षण जो मधुमास वह, दिल का है संसार ।।

दिल ने जब दिल से कही , मौन प्रणय की बात ।
दिल को फिर दिल से मिली, धड़कन की सौगात ।।

याचक दिल की याचना, दिल ने की स्वीकार।
बंद नयन में हो गया, अधरों का अभिसार।।

दिल से दिल की हो गई, संकेतों में बात ।
खामोशी करती रही, बातें सारी रात ।।

दिल से दिल की दिल्लगी, दिल से दिल की बात ।
दिल ने दिल को प्यार की, दी अनुपम सौगात ।।

दिल से दिल की डोर का, दिल है अन्तिम छोर ।
दिल से दिल मिल जाय तो, कैसे टूटे डोर ।।

दिल से दिल के हो गए , मौन मधुर संवाद ।
दिल की धड़कन में सदा, गूँजे दिल की नाद ।।

दिल करता एकांत में , दिल से दिल की बात ।
अंतस की हर बात का, मतलब कहती रात ।।

मौन मदन के रंग से, रैन हुई आबाद ।
मुदित नैन में लाज के, स्वरित हुए अनुवाद ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित
14-2-26

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय 

 दोहा मुक्तक :

 हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात

 कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार जज़्बात 

 झील  नदी  में  गुम  गई, पूर्ण हुआ अभिसार 

 सरसों   खेतों   खाँसती, जलते हैं खर-पात ।

 गुलाब  गैंदा  हँस  रहे, हीरे    जैसी     घास 

 कामुक भँवरा माँगता, कली कली सहवास 

 मादकता  बिखरी हुई, प्रकृति बनी चितचोर

 झरनों नदियों बह रही,वन  में  गन्ध सुवास ।

 प्रेम पाश में बँध गया, फूल  पात  हर जात

 पुष्प खिले हैं उपवनों, कि सुन्दर पारिजात 

 नदी झील अठखेलियाँ, करते कमल हुलास 

 और  किनारे हो रहीं, दिल से दिल की बात ।

 

 उतरा वसंत है प्रकृति, धरा व्योम साक्षात 

 तरह तरह के फूल से, रंग - बिरंग  प्रपात 

 हरसिंगार  के पुष्प हैं,खिले हुए  चहुँओर 

 आम्र वृक्ष है बौर वन, कल-रव दिल की बात 

मौलिक व अप्रकाशित 

 

 

आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।

ग़ज़ल   बह्र ए मीर

लगता था दिन रात सुनेगा

सब के दिल की बात सुनेगा

अपने जैसा लगता था वो

अपने सब ज़ज़्बात सुनेगा

टिन की छत के बैठ के नीचे

साथ मेरे बरसात सुनेगा

हाँ वो बड़े दिलवाला है तो

सब के सब फ़िक़रात सुनेगा

किन से आस लगाए हो तुम

दिल उन का इस्पात सुनेगा

फ़िरका परस्त लोगों की वो

सुनता है हज़रात सुनेगा

उस को इतना इल्म कहाँ 'जय'

पीड़ित की हक़ बात सुनेगा

मौलिक एवं अप्रकाशित 

आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

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आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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