आदरणीय साथिओ,
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वाह लाजवाब कथा | हठी के दन्त खाने के और दिखाने के और | समाज की सच्ची तस्वीर उभारी आपने | बहुत बहुत बधाई
आ.वीर जी बहुत सार्थक रचना कही है आपने. कथनी और करनी में अभी भी भेद है. वाह! वाह! बधाई आपको
बहुत बढ़ीया लघुकथा आदरणीय वीर भाई । लघुकथा का संक्षिप्त कथावस्तु, कथानक का प्रवाह व स्वभाविक रूप से आगे बढ़ना और घटनाक्रम की तारतम्यता सबके सुमेल से लघुकथा ऐसी एक सूत्र में पिरोयी गयी है कि आरंभ से अंतिम बिन्दु तक पाठक की उत्सुकता, उसका असमंजस बना रहता है । कौतुहलता का सन्निवेश व चरमोत्कर्ष पर पहुंचने के बाद 'डिस्पोज़ेबल गिलास' का कथ्य प्रस्तुत लघुकथा को जिस पराकाष्ठा तक ले गया है वह अद्वितिय है । यह इस आयोजन की सर्वश्रेष्ठ लघुकथाओं में से एक लघुकथा है। शीर्षक चयन इस बार भी थोड़ा कमज़ोर लगा । लघुकथा में निहित कथ्य से मद्देनज़र रखते हुए 'यूज़ एंड थ्रो' शीर्षक पर भी विचार किया जा सकता है । समग्रतय: इस सफल लघुकथा प्रेषण हेतु हार्दिक शुभकामनाएं । सादर
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