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नयना(आरती)कानिटकर
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नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आ. सभी सुधिजन जिन्होंने रचना पर अपना अमूल्य समय दिया सभी की आभारी हूँ.  दिन भर के काम से बहूत थक गई हूँ. अलग-अलग प्रतिक्रिया नहीं दे सकने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ. शुभरात्री"
Oct 31
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"प्रणाम भाई जी, आपने रचना को अनुमोदित कर दिया. दिली सुकून मिला. रचना का प्लाट तो ८-१० दिन पहले तैयार था .मगर टाईप करने का वक्त नहीं निकाल पा रही थी. आज जल्दी-जल्दी टाईप कर कथा पोस्ट की . वर्तनी की गलतियों को संपादन में ठीक करती हूँ.आभार आपका. इस बार…"
Oct 31
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आ. रवी दादा इन्कमटैक्स रिटन की फ़ाईलिंग डेट बढ जाने से मुझे मौका मिल गया यहाँ आने का. आपको कहाँ कालखंड दोष आभासित हुआ अगर बता सके तो रचना के सुधार में सहयोग मिलेगा. वैसे रचना में सासू माँ के बारे में जो बताया जा रहा वो एक प्रवाह में है तथा /// वह एक…"
Oct 31
नयना(आरती)कानिटकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
""अनावरण"----- उनका जीवन तो खाना बनाने में ही बित गया था। चालीस वर्षो से सुबह शाम बस  परिवार और कभी-कभी मेहमानों के लिए  मनोयोग से भोजन बनाना। कहती थी भोजन की हांडी कुछ ही समय में खाली हो जाती है। पर पढे-लिखे लोग जो…"
Oct 31
नयना(आरती)कानिटकर posted a blog post

हस्तरेखा (लघुकथा)

"इतना मान-सम्मान पाने वाली, फिर भी इनकी हथेली खुरदरी और मैली सी क्यों है?"-- हृदय रेखा ने धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए दूसरी से पूछा तो हथेली के कान खड़े हो गए। "बडे साहसी, इनका जीवन उत्साह से भरपूर है,फिर भी देखो ना..." मस्तिष्क रेखा ने फुसफुसा कर ज़बाब दिया। " देखो ना! मैं भी कितनी ऊर्जा लिए यहाँ हूँ, किंतु हथेली की इस कठोरता और गदंगी से.....!" जीवन रेखा भी कसामसाई। "अरे! क्यों नाहक क्लेष करती हो तुम तीनों? भाग्य रेखा तो तुम अपने संग लेकर ही नहीं आई, तब मैं क्या करती" हथेली से अब चुप ना रहा…See More
Oct 10
नयना(आरती)कानिटकर commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"आ.राज़ नवादवी "हथेली का आत्मविश्वास छलक उठी" टंकण त्रुटी है. उसे ठीक करती हू. आभार आपका रचना सराहने के लिए"
Oct 10
नयना(आरती)कानिटकर commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"आ. सुरेन्द्र जी ,आ.सलिम रजा जी,आ.समर कबीर जी,आ. नीता जी, आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी. आ. मोहम्मद आरिफ़ जी, आ.उस्मानी जी आप सभी का ह्रदयतल से आभार"
Oct 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"बहुत ही उम्दा और गहरे भावों का समावेश किया आपने आदरणीया.…हार्दिक बधाई"
Oct 10
राज़ नवादवी commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"आदरणीया नयना कानिटकर जी, आदाब. प्रतीकों में कही गई इस सुन्दर लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई. "हथेली का आत्मविश्वास छलक उठी" वाक्य में 'उठी' को 'उठा' कर लें, आत्मविश्वास शब्द पुल्लिंग है. सादर. "
Oct 9
Sheikh Shahzad Usmani commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"आपकी इस प्रतीकात्मक रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय नयना 'आरती' कानिटकर जी।"
Oct 8
Mohammed Arif commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"आदरणीया नयना आरती जी आदाब, रेखाओं का मानवीकरण करके बहुत ही उम्दा लघुकथा कही गई पने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"आद0 नयना जी सादर अभिवादन, बेहतरीन लघुकथा, बधाई र्आपको"
Oct 8
Nita Kasar commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"सारगर्भित कथा के लिये बधाई आद० नयना जी ।"
Oct 7
Samar kabeer commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"मोहतरमा नयना जी आदाब,बहुत अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 7
SALIM RAZA REWA commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"नयना जी, ख़ूबसूरत लघुकथा हस्तरेखा (लघुकथा) के लिए बधाई,"
Oct 7
surender insan commented on नयना(आरती)कानिटकर's blog post हस्तरेखा (लघुकथा)
"वाह लाजवाब जी बेहद उम्दा सार्थक रचना जी। सादर नमन जी।"
Oct 7

Profile Information

Gender
Female
City State
Bhopal
Native Place
BHopal
Profession
S.A
About me
i try to learn every thing which possible for me.taking interest in reading & writing

नयना(आरती)कानिटकर's Blog

हस्तरेखा (लघुकथा)

"इतना मान-सम्मान पाने वाली, फिर भी इनकी हथेली खुरदरी और मैली सी क्यों है?"-- हृदय रेखा ने धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए दूसरी से पूछा तो हथेली के कान खड़े हो गए।

"बडे साहसी, इनका जीवन उत्साह से भरपूर है,फिर भी देखो ना..." मस्तिष्क रेखा ने फुसफुसा कर ज़बाब दिया।

" देखो ना! मैं भी कितनी ऊर्जा लिए यहाँ हूँ, किंतु हथेली की इस कठोरता और गदंगी से.....!" जीवन रेखा भी कसामसाई।

"अरे! क्यों नाहक क्लेष करती हो तुम तीनों? भाग्य रेखा…

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Posted on October 7, 2017 at 4:00pm — 11 Comments

वो दिन---

"तुम रातभर बैचेन थी। हो सके तो आज आराम करो। मैंने चाय बनाकर थर्मस में डाल दी हैं। मैं नाश्ता, खाना आफ़िस में ही ली लूँगा, तुम बस अपना बनवा लेना। आफ़िस से छुट्टी ले लो।"

पास तकिए पर रखे कागज को पढा और चूमकर सीने पर रख लिया। आफ़िस में इस एक दिन के अवकाश की लड़ाई लड़ी और जीती भी थी।

चाय का कप लेकर बालकनी में आई तो सहज ही प्लास्टिक की पन्नियाँ बीनती उन लड़कियों पर नजर गयी। उफ्फ, ये लोग क्या करती होंगी इन दिनों? कप हाथ में लिए-लिए ही झट नीचे आयी। उन्हें आवाज लगाकर अपने…

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Posted on September 25, 2017 at 9:30pm — 8 Comments

"दो घडी का सुख"

उसने सिला गये बेसन  को थाली में फैलाकर चूल्हे  की गरम राख को थोडा सार कर उस  पर रख दिया था ताकि पसीजन से आई बदबू  खत्म हो जाए. आज पहली बार रमेश्या ने उसे ढाई सौ ग्राम तेल लाकर दिया था घर में. वरना तो वह अपनी सारी कमाई शराब में ही फूक देता था. वह  भी काम से आते वक्त बीबी जी से दो प्याज माँगकर ले आई थी.

बाहर आसमान भी आज उसके घर में खुशी बरसाने के भाव मे था. चाँद का उजाला ना सही इस छोटे से सुख में  घुमडते बादलों सा उसका मन झूम-झूम उठा  था.

"आज ही तो तू आई थी मेरे जीवन में…

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Posted on July 31, 2017 at 7:45pm — 11 Comments

एक पहलू ये भी---

"अरे! सुनंदा सुनो भाई कब से फोन पर बातें कर रही हो. चलो अब खाना लगाओ जी. बडी भूख लगी है. क्या  इतनी लंबी बातें किए जा रही हो." 



"जी! "अंकुर" से. बता रहा आज किसे बिज़नेस …

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Posted on June 9, 2017 at 10:45pm

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At 2:01pm on September 3, 2013, annapurna bajpai said…

welcome ,Nayana ji in our O B O family . 

 
 
 

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