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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मिथिलेश जी आपकी रचना बहुत बेहतरीन है बधाई हो"
Nov 18
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"भाई सुरेन्द्र जी उत्साह वर्धन के लिए दिली मुबारकबाद"
Nov 18
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"आदरणीय आरिफ साहब आपके हौसला अफ़जाई से मन आनन्दित हुआ दिल से आभार"
Nov 18
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"आदरणीय अखिलेश जी आपके उत्साह वर्धन से मन खुश हुआ दिल से साधुवाद"
Nov 18
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"आदरणीय रामबली जी सादर नमन आपके मार्गदर्शन से अभिभूत हुआ दिल से आभार"
Nov 18
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"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब सादर नमन आपकी दोनों रचनाएँ उम्दा भाव के साथ सृजित हैं बहुत बहुत मुबारकबाद आपको"
Nov 18
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"आदरणीय गोपाल जी आपकी मार्मिक रचना हृदयतल को छू गयी बहुत ही उम्दा भाव के साथ सृजन किया आपने बहुत बहुत मुबारकबाद"
Nov 18
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"आदरणीय रामबली जी बहुत बेहतरीन रचना पढ़कर आनंद आ गया बहुत बहुत मुबारकबाद"
Nov 18
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"वाह भाई सुरेन्द्र जी बहुत बेहतरीन चित्रानुरूप सृजन बधाई हो इस आकर्षक रचना के लिए"
Nov 17
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"आदरणीया प्रतिभा जी आपकी रचना सन्देश परक है ,पढ़कर हमें बड़ी खुशी मिली ढेर सारी शुभकामनाएं"
Nov 17
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"आदरणीय अखिलेश श्रीवास्तव जी सादर नमन आपकी रचना पढ़कर हमें बड़ी खुशी मिली ,अतीव सुंदर कामरूप छन्द बहुत बहुत मुबारकबाद"
Nov 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छन्द अबला समझी जाने वाली, बनकर सबला आज। साहस का नित परिचय देती, बचा रही है लाज।। निःसंकोच उस्तरा लेकर,चला रही परिवार। काम बड़ा हो चाहे छोटा, करती बारम्बार।। बैठ जमीं पर बड़े प्रेम से, करती जाती काम। अगल बगल छप्पर दिखता है,शोभित होता…"
Nov 17
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post धुँआ (सरसी छन्द)
"जनाब डॉ.छोटेलल सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा सरसी छन्द रचे आपने ,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । पहले छन्द के पहले पद में 'बेहाल'और 'मुहाल'की तुकान्तता सही नहीं है,देखियेगा ।"
Nov 15
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post धुँआ (सरसी छन्द)
"वाह आदरणीय बहुत उम्दा रचना..बधाई"
Nov 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post धुँआ (सरसी छन्द)
"आद0 डॉ भैया छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन, समसामयिक विषय पर सरसी छःन्द में बढ़िया प्रस्तुति, बधाई स्वीकार करें। सादर"
Nov 15
Sushil Sarna commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post धुँआ (सरसी छन्द)
"वाह आदरणीय डॉ छोटेलाल जी ज्वलंत समस्या पर सरसी छंद में सुंदर प्रस्तुति।  हार्दिक बधाई। "
Nov 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

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धुँआ (सरसी छन्द)

*धुआँ (सरसी छःन्द)*



आसमान में धुआँ धुआँ है, हुए सभी बेहाल |

व्याकुलता बढ़ती जाती है, जीना हुआ मुहाल ||



काली धुंध सड़क पे छायी, मुश्किल चलनी राह |

नर नारी सबके ही मुख से, निकल रही है आह ||



अस्त व्यस्त सारा जन जीवन, सुनता कौन पुकार |

आपस में कर खींचातानी,बढ़ा रहे तकरार ||



जिम्मेदारी भूल गए हैं, सभी बजाते गाल |

दिल के भीतर कालापन है, बिगड़ गयी है चाल ||



धुँधलायी नित बढ़ती जाती,उठता रोज सवाल |

फिक्र नहीं है यहाँ किसी… Continue

Posted on November 13, 2017 at 5:51pm — 12 Comments

बेहाल जिन्दगी

बेहाल जिन्दगी



बिखरे सूखे पत्तों के बीच

फूस की झोपड़ी में

बेहाल जिन्दगी

अटकी साँसे

दुहाई दे रही थीं

सिर्फ जीने के लिए

दूर स्थित खेत में

कुछ काले श्वान

दूषित मटमैले

चेहरों पर भौंक रहे थे

बार बार गूँजती आवाज

सहमा डरा चेहरा

बहुत निराश

कम्पित भयावहता के बीच

कुछ टूटे फूटे बर्तन

बिखरे पड़े इधर उधर

बहते अश्रुओं के बीच

कोस रहे थे

अपनी बदनसीबी पर

निरीह आँखे निहार रही थी

ऊँचे मुंडेर… Continue

Posted on October 31, 2017 at 12:23pm — 18 Comments

दीवाली (सरसी छन्द)

दीवाली (सरसी छन्द)





दिल से दिल के तार मिलाएं, दीवाली के नाम

खाएं और खिलाएं सबको,दें अच्छा पैगाम



एक दीप सा बन जीवन में, करें सदा उल्लास

मन मंदिर में ज्ञानदीप से,नित ही करें प्रकाश



झूम झूमकर खुशी मनाएं,बैठें सबके संग

कर्म सुगम पथ सब अपनाएं,सीख हुनर औ ढंग



बोलें मीठी वाणी सबसे,करें नहीं विद्वेष

दुनिया में है सबसे न्यारा,प्यारा भारत देश



एक बनेंगे नेक बनेंगे,ऊँचा होगा नाम

सुन्दर समाज अपना होगा,नेक करेंगे… Continue

Posted on October 25, 2017 at 3:31pm — 9 Comments

बचपन

बचपन होता कितना प्यारा

लगता है हम सबको न्यारा

भेदभाव से है अनजाना

हर गम से होता बेगाना ll



खेलकूद कर हँसता गाता

स्नेह भाव से रखता नाता

नटखट रूप सदा मन भाये

नाचे गाये और बजाये ll



गेमतड़ी औ गिल्ली डंडा

पाये जीत लगा हथकंडा

आइस पाइस छुपन छुपाई

बचपन कितना प्यारा भाई ll



बचपन का हर पन्ना सादा

सीख रहा सबसे मर्यादा

मन की झिझक मिटाता जाता

खाता पीता हँसता गाता ll



मधुर घड़ी बचपन की होती

मात पिता बिन… Continue

Posted on October 18, 2017 at 4:33pm — 9 Comments

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