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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह's Page

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Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post सबक
"सच का कड़वा चिट्ठा। बेहतरीन विचारोत्तेजक सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब डॉ. छोटे लाल सिंह जी।"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post सबक
"वाहः वाहः आ छोटे जी उम्दा गजल कही"
4 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

सबक

सबकदेश खोखला होता जाता,आज यहाँ मक्कारों से सदा कलंकित होता भारत, भीतर के गद्दारों सेलाज शर्म है नहीं किसी को, अपना नाम डुबाने में मटियामेट करे इज्जत को, देखो आज जमाने में  देश धरा के जो हैं दुश्मन, सबको नाच नचाते हैं सारी अर्थव्यवस्था को वे, तितर वितर कर जाते हैंअपनी मर्जी के हैं मालिक, अपना हुक्म चलाते हैं लूट लूट कर भरे तिजोरी, फिर ये गुम हो जाते हैंआज व्यवस्था जमीदोज है, हर जुर्मी हैवानों से कैसे मुक्ति मिले भारत को, इन पाजी शैतानों सेबड़े कुकर्मी कातिल हैं ये, सबकुछ चट कर जाएंगे अपनी माँ के…See More
7 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पण्डे जी आपकी रचना चित्रानुरूप उम्दा भाओं से ओतप्रोत है इस आकर्षक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन आपकी रचना चित्रानुरूप आकर्षक भाओं समाहित किये हुए मन को जीतने वाली रचना है इस मनोरम रचना…"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदणीय मो आरिफ साहब सादर अभिवादन आपकी दोनों रचनाएँ चित्रानुरूप…"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आरिफ साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से लेखनी सफल हुई आपको दिल से साधुवाद"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय खान साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ बहुत बहुत धन्यवाद"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आपकी रचना चित्रानुरूप उम्दा भाव को समेटे बहुत ही बेहतरीन हैं दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन आपकी दोनों रचनाएँ चित्रानुरूप बहुत उच्च कोटि की रचनाएँ है…"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छन्द बड़े चाव से नार नहला रही गिराती सदा नीर सहला रही जमीं पर बिठाई न सुविधा मिले अकेले विचारी न शिक़वे गिले गिराती उठा मग वहाँ जल भरे सुनाई पड़े चीख मन ये डरे हरी रंग चूड़ी कलाई कसी सजाने चली प्यार दिल मे बसी खुली हसरतों में न चाहत…"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शेख सहजाद साहब आपकी रचना बहुत बेहतरीन है चित्रानुरूप आपकी कोशिश लाजबाब है दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"भाई सुरेन्द्र जी आपकी रचना चित्रानुरूप बहुत बेहतरीन है भाव सम्प्रेषण उम्दा है दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये "
Feb 17
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छन्द बड़े चाव से नार नहला रही गिराती सदा नीर सहला रही जमीं पर बिठाई न सुविधा मिले अकेले विचारी न शिक़वे गिले गिराती उठा मग वहाँ जल भरे सुनाई पड़े चीख मन ये डरे हरी रंग चूड़ी कलाई कसी सजाने चली प्यार दिल मे बसी खुली हसरतों में न चाहत…"
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद साहब आपको रचना पसन्द आयी ,आपने उत्साह वर्धन किया दिल से शुक्रिया"
Jan 19
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आरिफ साहब हौसलाफजाई के लिए दिल से आभार सादर"
Jan 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

सबक

सबक

देश खोखला होता जाता,आज यहाँ मक्कारों से

सदा कलंकित होता भारत, भीतर के गद्दारों से

लाज शर्म है नहीं किसी को, अपना नाम डुबाने में

मटियामेट करे इज्जत को, देखो आज जमाने में  

देश धरा के जो हैं दुश्मन, सबको नाच नचाते हैं

सारी अर्थव्यवस्था को वे, तितर वितर कर जाते हैं

अपनी मर्जी के हैं मालिक, अपना हुक्म चलाते हैं

लूट लूट कर भरे तिजोरी, फिर ये गुम हो जाते हैं

आज व्यवस्था जमीदोज है, हर जुर्मी हैवानों से

कैसे मुक्ति मिले भारत को, इन पाजी…

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Posted on February 25, 2018 at 9:21am — 2 Comments

परिवर्तन (सरसी छन्द)

परिवर्तन (सरसी छन्द)



प्रचंड लीला परिवर्तन की, सभी झेलते मार

पुष्प सदा जो खिलते रहते, कम्पित होती डार।1।



भृंग मधुर रव तान सुनाते, करते वे मदहोश

गम में सभी सहन करते हैं, परिवर्तन आक्रोश।2।



हरित पर्ण पर हिमकन शोभित, नर्तन करती रोज

परिवर्तन का तांडव पल में, धूमिल करता ओज ।3।



सदा बाग का माली हँसता, सुषमा देख अपार

पतझड़ में नित रुदन करे वह, दिखता हाहाकार।4।



परिवर्तन की विषम ज्वाल में, जलता राज समाज

चीख पुकार सुनाई देती,… Continue

Posted on November 27, 2017 at 6:57pm — 7 Comments

धुँआ (सरसी छन्द)

*धुआँ (सरसी छःन्द)*



आसमान में धुआँ धुआँ है, हुए सभी बेहाल |

व्याकुलता बढ़ती जाती है, जीना हुआ मुहाल ||



काली धुंध सड़क पे छायी, मुश्किल चलनी राह |

नर नारी सबके ही मुख से, निकल रही है आह ||



अस्त व्यस्त सारा जन जीवन, सुनता कौन पुकार |

आपस में कर खींचातानी,बढ़ा रहे तकरार ||



जिम्मेदारी भूल गए हैं, सभी बजाते गाल |

दिल के भीतर कालापन है, बिगड़ गयी है चाल ||



धुँधलायी नित बढ़ती जाती,उठता रोज सवाल |

फिक्र नहीं है यहाँ किसी… Continue

Posted on November 13, 2017 at 5:51pm — 12 Comments

बेहाल जिन्दगी

बेहाल जिन्दगी



बिखरे सूखे पत्तों के बीच

फूस की झोपड़ी में

बेहाल जिन्दगी

अटकी साँसे

दुहाई दे रही थीं

सिर्फ जीने के लिए

दूर स्थित खेत में

कुछ काले श्वान

दूषित मटमैले

चेहरों पर भौंक रहे थे

बार बार गूँजती आवाज

सहमा डरा चेहरा

बहुत निराश

कम्पित भयावहता के बीच

कुछ टूटे फूटे बर्तन

बिखरे पड़े इधर उधर

बहते अश्रुओं के बीच

कोस रहे थे

अपनी बदनसीबी पर

निरीह आँखे निहार रही थी

ऊँचे मुंडेर… Continue

Posted on October 31, 2017 at 12:23pm — 18 Comments

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