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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह's Page

Latest Activity

vijay nikore commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"सुन्दर गीत के लिए बधाई, मित्र छोटेलाल सिंह जी।"
Jan 7

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"प्रस्तुति प्रभावी है, इस हेतु आपकेे रचनाकर्म के प्रति साधुवाद. प्रयास बना रहे.  किंतु, एक बात जो समझ में न आयी, कि, आपने प्रस्तुत गीत को नवगीत की श्रेणी में किस आधार पर रख दिया ? अन्यथा का वर्गीकरण रचना की गरिमा के प्रति आश्वस्त नहीं होने…"
Jan 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"आ. भाई छोटेलाल जी,  सादर अभिवादन। नवगीत के रूप में बेहतरीन प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Jan 3
आशीष यादव commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"मधुर शहद सी सुन्दर गीत सुनाता चल.........  बहुत सुन्दर।"
Jan 2
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"आदरणीया डॉ गीता चौधरी जी उत्साह वर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Jan 2
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"भाई सुरेन्द्र जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
Jan 2
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"आद0 छोटेलाल भैया सादर अभिवादन। नवगीत के रूप में बेहतरीन प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिए। सादर"
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"आदरणीय डॉ० छोटेलाल सिह जी गीत बहुत अच्छा लगा। हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।"
Jan 1
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल। जीवन में मुस्काता चल।।मन मराल को कभी मनोहत मत करना । हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना। गम को भूल सभी से नेह लगाता चल। जीवन में मुस्काता चल।।वैर भाव की ये खाई पट जाएगी। वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी। बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल। जीवन में मुस्काता चल।।महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में जानराय बन ओज जगाओ जनजन में। हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल। जीवन में मुस्काता चल।।परिक्षाम हृतपीड़ा मिलकर दूर करो। बन भवनिष्ठ मनस्तल के मद चूर करो। मनोराग मन से हरपल बरसाता चल। जीवन में…See More
Jan 1
डॉ छोटेलाल सिंह commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय मोहन जी इस सुंदर गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 1
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीय शाहिद जी बेहतरीन रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 1
डॉ छोटेलाल सिंह commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भूख गरीबी जाति धर्म से लड़ना नूतन साल यहाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी नव वर्ष की मंगल कामनाओं सहित इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 1
डॉ छोटेलाल सिंह commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post उन्नीस-बीस (2019-2020) नूतन वर्ष
"आदरणीय प्रदीप जी इस आकर्षक उन्नीस बीस प्रयास के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 1
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार"
Dec 15, 2019
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
Dec 15, 2019
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीय राणा जी सुंदर भावात्मक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 15, 2019

Profile Information

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Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

जीवन की संध्या

जहाँ बुजुर्गों की सेवा हो, जीवन सुखमय होता है।
जो ठोकर देता बूढ़ों को, भार दुखों का ढोता है।।
अभिवादन नित करने वाले,सौम्य शील गुण पाते हैं।
वृद्ध अनादर करने वाले, खुद पीछे रह जाते हैं।।
रोदन करता जहाँ बुढ़ापा, घर आँगन भी रोते हैं।
इज्जत तार-तार होती जब, बूढ़े भूखे सोते हैं।।
कोमल किसलय को आँचल में, ढँककर दूध पिलाई थी।
अस्थिशेष असहाय निबल तन, झुकी कमर माँ ताई थी।।
पिचके गाल कराल हाल में, खाँस रहे बूढ़े…
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Posted on October 1, 2019 at 1:00pm — 4 Comments

व्यथित हृदय

व्यथित हृदय

अनुपम सृजन सृष्टि की बेटी

बेटी को ना ठुकराएं।

प्यार मुहब्बत की निधि बेटी

हाथ बढ़ाकर अपनाएं।।

बेटी अगर अनादृत होगी

जग कलुषित हो जाएगा।

आन मान सम्मान धरा पर

कहीं नहीं बच पायेगा।।

मृदुल भाव मधु सदृश बेटियाँ

जग रोशन नित करतीं हैं।

अंतर्मन के हर विषाद तम

सुखद अमिय रस भरतीं हैं।।

सस्मित सुरभि लुटाकर हर पल

जग मधुमय कर देतीं हैं।

सदा अंक में प्रदीप्त करके

हर बाधा हर लेतीं…

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Posted on September 27, 2019 at 7:05pm — 7 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

At 9:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मिट्टी की तासीरें जिस को ज्ञात नहीं -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।बेहतरीन गज़ल। लूटपाट  है …"
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"आद0 प्रदीप देवी शरण भट्ट जी सादर अभिवादन। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये"
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vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसके पुरखे भटकाने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आप गज़ल अच्छी लिखते हैं। हार्दिक बधाई, मित्र लक्ष्मण जी।"
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