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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
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"आदरणीय राणा जी अद्भुत प्रयोग में आपने गजब लिखा बहुत बहुत बधाई"
yesterday
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"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहब चित्रानुरूप आकर्षक कुण्डलिया लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई सादर"
yesterday
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"आदरणीया अनामिका जी बहुत बेहतरीन सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई"
yesterday
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"सार्थक प्रयास के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीय दण्डपाणि जी  "
yesterday
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"बहुत बेहतरीन सार्थक  सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीय अजय जी "
Sunday
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"बहुत बेहतरीन कुण्डलिया आदरणीया अनामिका जी बधाई कुबूल कीजिये"
Sunday
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"आदरणीय समर साहब उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सादर"
Sunday
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"धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा जी सादर"
Sunday
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"सादर धन्यवाद आदरणीय अजय जी "
Saturday
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"आदरणीय रक्ताले साहब सादर अभिवादन आपके मार्गदर्शन से नई ऊर्जा मिली हम आपके उत्साह वर्धन से बहुत प्रसन्न हैं सादर नमन आपको"
Saturday
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"तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब "
Saturday
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"आदरणीय अखिलेश जी उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत आभार ,आपदा में साधन संपन्न की अपेक्षा गरीबों की तकदीर…"
Saturday
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"आदरणीय अखिलेश जी सादर अभिवादन आपकी दोनों रचनाएँ चित्रानुरूप बहुत ही बेहतरीन हैं दिली बधाई कुबूल कीजिए"
Saturday
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"कुण्डलिया बढ़ती नदी उफान पर,झंखे ये तकदीर साफ गरीबी झलकती,दर्शाती तस्वीर दर्शाती तस्वीर,एक बैठा ले छाता धोती कम्बल नार,दिखे आपस का नाता छाता से दे छाँव, नदी बारिश में चढ़ती कहीं मिले ना ठाँव,गरीबी दिन दिन बढ़ती ll टब पत्थर पर है पड़ा, बाल्टी वहीं…"
Saturday
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"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब बहुत बेहतरीन सृजन किया ताटंक में शौहर मंजर को छोड़ बाकी जबरदस्त सृजन बधाई कुबूल कीजिये"
Saturday
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"आदरणीया प्रतिभा जी इतनी बारीकी से चित्रण किया मन झूम उठा दिली बधाई कुबूल कीजिए"
Saturday

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Male
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Varanasi
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Varanasi
Profession
Teacher
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I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

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श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि

हिन्दी का जग सूना सूना,कवि नीरज के जाने से

मर्माहत साहित्य जगत है, यह हीरा खो जाने से

भूल नहीं पाएंगे हम सब,नीरज की कविताओं को

गीतों में ढाला है जिसने,नित मदमस्त फिजाओं को ll

देदीप्यमान अम्बरादित्य, बिन काव्यजगत ये रीता है

नीरज अब नीर विलीन हुआ, मन भ्रमर गमों को पीता है

मुखरित होता था प्रेम रुदन,सौंदर्य वेदना गीतों में

इक रूह झंकरित होती थी, उनके हर संगीतों में ll

कविता कानन का मन मयूर, ढूंढ…

Continue

Posted on July 23, 2018 at 2:51pm — 6 Comments

नन्हीं चींटी

 नन्हीं चींटी

श्रमजीवी नन्हीं चींटी को 

दीवारों पर चढ़ते देखा

रेखाओं सी तरल सरल को

बाधाओं से लड़ते देखा ll

श्रमित न होती भ्रमित न होती

आशाओं की लड़ी पिरोती

कभी फिसलती कभी लुढ़कती

गिर गिर कर पग आगे रखती ll

सहोत्साह नित प्रणत भाव से

दुर्धर पथ पर बढ़ते देखा ll

मन में नहीं हार का भय है

साहस धैर्य भरा निर्णय है

लाख गमों को दरकिनार कर

एक लक्ष्य जाना है ऊपर…

Continue

Posted on May 29, 2018 at 8:51am — 6 Comments

अस्थिशेष

अस्थिशेष (अतुकांत)



श्रम में तन्मय

अस्थिशेष

बस एक लक्ष्य

बस एक ध्येय

अपना काम

स्वप्न वैभव से दूर

मन तरंग पर हो सवार

कर्म को कर अवधार्य

लघुता का नहीं भार l

कहने को गगनचुंबी अट्टालीकाएँ

अनमोल झरोखे

रंग रोगन रूवाब

झिलमिलाती बत्तियां

मीठे ख्वाब

कंचन सी चमक दमक

ऐसो आराम

बेफिक्र मन प्रमन l

क्या पता ?

सुदूर विजन में

अम्बर तले

एक अदना सा

बेरूप बेनाम

सुखाता चाम

तापता घाम… Continue

Posted on May 5, 2018 at 7:44am — 9 Comments

अतुकांत

मैं लिख नहीं सकता l

मैं लिख नहीं सकता 

वाणी के पर खोलकर

अम्बुधि के उर्मिल प्रवाह पर

उत्कंठित भावभंगिमा से

नीरवता का भेदन करके

घन तिमिर बीच में बन प्रभा

मधुकरी सदृश गुंजित रव से

अविरल नूतनता भर देता

मैं लिख नहीं सकता l

भू अनिल अनल में 

उथल पुथल 

अनृत प्रवाद का मर्दन कर 

इतिवृत्तहीन विपुल गाथा

मुख अवयव से 

पुष्कल निनाद

हो अनवरुद्ध

झंकृत करता 

मैं…

Continue

Posted on April 25, 2018 at 12:31pm — 7 Comments

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