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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post जीवन की संध्या
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन बहुत प्रसन्न होता है ,दिल से आभार आपका"
Oct 7
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post जीवन की संध्या
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"आ.भाई, छोटेलाल जी, अच्छी रचना हुई है हार्दिक बधाई।"
Oct 7
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से एक नयी ऊर्जा मिलतीहै ,आपका दिल से आभार "
Oct 4
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,बेटियों पर बहुत अच्छी रचना लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 4
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post जीवन की संध्या
"आदरणीय श्यामनारायन वर्मा जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार"
Oct 2
Shyam Narain Verma commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post जीवन की संध्या
"आदरणीय डॉ. छोटे लाल सिंह जी, प्रणाम, बुढ़ापे पर उपदेशात्मक उम्दा रचना पर हार्दिक बधाई l सादर"
Oct 2
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

जीवन की संध्या

जहाँ बुजुर्गों की सेवा हो, जीवन सुखमय होता है।जो ठोकर देता बूढ़ों को, भार दुखों का ढोता है।।अभिवादन नित करने वाले,सौम्य शील गुण पाते हैं।वृद्ध अनादर करने वाले, खुद पीछे रह जाते हैं।।रोदन करता जहाँ बुढ़ापा, घर आँगन भी रोते हैं।इज्जत तार-तार होती जब, बूढ़े भूखे सोते हैं।।कोमल किसलय को आँचल में, ढँककर दूध पिलाई थी।अस्थिशेष असहाय निबल तन, झुकी कमर माँ ताई थी।।पिचके गाल कराल हाल में, खाँस रहे बूढ़े बाबू।पल-पल झिड़की देता बेटा, रौद्र रूप धर बेकाबू।।वृद्धाश्रम में घुटते बूढ़े, बच्चे मौज मनाते हैं।जीवन के इस…See More
Oct 2
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"आदरणीय बृजेश ब्रज जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
Oct 1
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"आदरणीय सत्यम जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार ,कोशिश करूँगा"
Oct 1
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"अनुपम अमिट भावों को समेटती हुई रचना....हार्दिक बधाई "
Oct 1
dandpani nahak left a comment for डॉ छोटेलाल सिंह
"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Sep 29
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय तनवर साहब बहुत अच्छी गजल हुई दिल से बधाई"
Sep 28
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय अनीस शेख साहब अच्छी गजल के लिए बधाई"
Sep 28
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय कमर जौनपुरी साहब बहुत बेहतरीन गजली लिखी आपने दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये"
Sep 28
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय नादिर खान साहब अच्छी गजल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Sep 28

Profile Information

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Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

जीवन की संध्या

जहाँ बुजुर्गों की सेवा हो, जीवन सुखमय होता है।
जो ठोकर देता बूढ़ों को, भार दुखों का ढोता है।।
अभिवादन नित करने वाले,सौम्य शील गुण पाते हैं।
वृद्ध अनादर करने वाले, खुद पीछे रह जाते हैं।।
रोदन करता जहाँ बुढ़ापा, घर आँगन भी रोते हैं।
इज्जत तार-तार होती जब, बूढ़े भूखे सोते हैं।।
कोमल किसलय को आँचल में, ढँककर दूध पिलाई थी।
अस्थिशेष असहाय निबल तन, झुकी कमर माँ ताई थी।।
पिचके गाल कराल हाल में, खाँस रहे बूढ़े…
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Posted on October 1, 2019 at 1:00pm — 4 Comments

व्यथित हृदय

व्यथित हृदय

अनुपम सृजन सृष्टि की बेटी

बेटी को ना ठुकराएं।

प्यार मुहब्बत की निधि बेटी

हाथ बढ़ाकर अपनाएं।।

बेटी अगर अनादृत होगी

जग कलुषित हो जाएगा।

आन मान सम्मान धरा पर

कहीं नहीं बच पायेगा।।

मृदुल भाव मधु सदृश बेटियाँ

जग रोशन नित करतीं हैं।

अंतर्मन के हर विषाद तम

सुखद अमिय रस भरतीं हैं।।

सस्मित सुरभि लुटाकर हर पल

जग मधुमय कर देतीं हैं।

सदा अंक में प्रदीप्त करके

हर बाधा हर लेतीं…

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Posted on September 27, 2019 at 7:05pm — 7 Comments

मातृभाषा हिन्दी

हिन्दी में हम पढ़े लिखेंगे, हिन्दी ही हम बोलेंगे।
हिन्दी को घर-घर पँहुचाकर, हिन्द द्वार हम खोलेंगे।
सकल हिन्द के हित में हिन्दी,सबको यह बतलायेंगे
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, हिन्दी को फैलायेंगे।।
शर्मसार अपनी हिन्दी को, कभी नहीं होने देंगे।
हिन्दी है सम्भार हिन्द की, इसे नहीं खोने देंगे।
भ्रांत मनुज के गहन तिमिर को,दूर भगाएगी हिन्दी।
कटु विषाद मन जनित व्याधि को,सदा मिटाएगी हिन्दी।।
हिन्दी बिना हिन्द की…
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Posted on September 14, 2019 at 8:15pm — 4 Comments

करगिल विजय

*करगिल विजय*

वज्रपात कर दुश्मन दल पर, सबक सिखाया वीरों ने

किया हिन्द का ऊँचा मस्तक, करगिल के रणधीरों ने

हर खतरे का किया सामना, लड़ी लड़ाई जोरों से

पग पीछे डरकर ना खींचे, बुझदिल और छिछोरों से l

धीर वीर दुर्गम चोटी पर, कसकर गोले दागे हैं

बंकर चौकी ध्वस्त किये सब, कायर कपूत भागे हैं

किये हवाई हमला भारी, धूर्त सभी थर्राए हैं

अरि मस्तक को कुचल-कुचल कर, अपना ध्वज लहराए हैं l

जब-जब दुस्साहस करता है, दुश्मन मारा जाता है

सरहद का…

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Posted on July 26, 2019 at 7:37pm — 3 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

At 9:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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