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Ravi Prabhakar
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Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"/ अगर मैं किसी सल्तनत का मालिक होता तो आपको यक़ीनन जागीरें अता कर देता/ आदरणीय समर कबीर सर आप हमारे दिल पर हकूमत करते हो और अापके यह प्‍यारे अल्‍फ़ाज मेरे लिए हज़ारों जागीरों से ज्‍यादा मूल्‍यवान हैं। आपके स्‍नेह और आशीर्वाद के…"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"हार्दिक आभार आदरणीय अलका जी ।"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"समीक्षा तो जो है सो है पर आपने जिस शिद्दत और सूक्ष्‍मता से उसे पढ़ा है और जिस खूबसूरत शब्‍दों से मुझे निवाजा है उसके लिए हार्दिक शुक्रगुजार हूं आदरणीय वीर भाई । सादर"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"'मेरा मुझ में कछु नाहीं, जो कछु है सो तेरा' हार्दिक आभार भरदान संपादक महोदय ।"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"हार्दिक आभार जानकी मॉं :-) । इस प्रयास को इतना मान देने हेतु। सादर"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"इस समीक्षा पर आपकी 'समीक्षा' ने मन मोह लिया। आप सरीखे लघुकथा के मर्मज्ञ को प्रयास सार्थक लगा इस हेतु आभारी हूं ।"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी । आपकी लघुकथाओं पर कुछ कहने का ईमानदारी से किया गया प्रयास आपको बढ़ीया लगा जिस हेतु शुक्रगुजार हूं। कुछ कहने का प्रयास कर पाया इसके लिए इस मंच का ही योगदान है, जो कुछ सीखा है इसी मंच से सीखा है। ओबीओ…"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"आपका हार्दिक अाभार आदरणीय सीमा सिंह जी ।"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"समीक्षा पढ़ कर अपने विचार रखने हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय कल्‍पना जी ।"
Oct 10
Ravi Prabhakar replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"हार्दिक आभार उस्‍मानी भाई ।"
Oct 10
Ravi Prabhakar commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल - चाहे आँखों लगे, आग तो आग है.. // --सौरभ
"आदरणीय भाई जी, बहुत ही बढ़ीया ग़ज़ल कही । तकनीकी तौर पर तो कुछ कहने के काबिल नहीं हूं । परन्‍तु भाव बहुत ही बढ़ीया है खासकर : नौनिहालों की आँखों के सपने लिये बाप इक जुट गया, दुपहरी खिल उठी यह शे' अर एकदम से दिल में उतर गया। हार्दिक बधाई…"
Oct 8

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"आपका बहुत बहुत आभार आद० अलका कृष्णांशी जी "
Oct 8

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"बहुत बहुत आभार आद० वीरेन्द्र वीर मेहता जी "
Oct 8

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"बिजनोर के पेपर पब्लिक इमोशन में छपी ये समीक्षा .पेपर में उन्होंने छोटी कर दी है ."
Oct 8
Samar kabeer replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"जनाब डॉ.रवि प्रभाकर साहिब आदाब,बहना राजेश कुमारी के लघुकथा संग्रह 'गुल्लक'की समीक्षा पढ़कर बहुत कुछ सीखने को मिला,आपने जिस ख़ूबी से एक एक लघुकथा का जिस बारीकी से मुतालिआ किया और एक एक बिंदु पर बात की है वो वाक़ई क़ाबिल-ए-दाद-ओ-सताइश है, अगर…"
Oct 6
अलका 'कृष्णांशी' replied to Ravi Prabhakar's discussion ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं in the group पुस्तक समीक्षा
"आदरणीय रवि प्रभाकर सर , पुस्तक की सुंदर समीक्षा प्रशंसनीय है। पुस्तक की विस्तृत समीक्षा वास्तव में नवांकुरों के लिये मील का पत्थर हैं। आदरणिया राजेश कुमारी दी , इस लघुकथा संग्रह के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।"
Oct 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Patiala
Profession
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About me
A Straight Forwerd Man.

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सिसकियां (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘चल अब छोड़, जाने भी दे! इसमें इतना रोने की क्या बात है, यह कोई नयी बात थोड़े ही है। हम जैसे लोगों के साथ तो ये हमेशा से ही होता आया है। तू इतने टेसुए क्यों बहा रही हो ? वैसे गल्ती भी तेरी ही है, अगर तुझे प्यास लगी थी तो अपने पीने का पानी बाहर ही तो रखा होता है फिर तू रसोईघर में क्यों गई ?’ सिसक रही अपनी पत्नी को वो दिलासा दे रहा था।

‘मैं तो यही सोच कर इनके यहां काम करने को लगी थी कि चलो पढ़-लिख कर अफसर बन गए है तो क्या हुआ, हैं तो ये हम लोगों में से ही ना। पर ये लोग... कोई और हमारे…

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Posted on January 18, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

मुखौटे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

 ‘बेशक हमारे भाई साहिब को देश छोड़े एक अर्सा हो गया यू.एस.ए. में उन्होनें अपना बिजनेस एम्पायर खड़ा कर लिया है पर उन्हें अपने देश और अपनी संस्कृति से अब भी बहुत प्यार है। इसलिए वो अपने बेटे के लिए मेम नहीं बल्कि एक सुसंस्कृत भारतीय बहू चाहते है।’ शहर के नामचीन बिल्डर अपनी डाॅक्टर पत्नी सहित मेयर साहिब के घर उनकी इकलौती बेटी के लिए अपने भतीजे के रिश्ते के सिलसिले के लिए बतिया रहे थे।

‘यह तो बहुत अच्छी बात है। मेरी बहन व बहनोई भी यू.एस.ए. सिटीज़न हैं । वो आपके भाई साहिब को बहुत…

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Posted on December 19, 2015 at 1:46pm — 9 Comments

संत्रास (लघुकथा) : रवि प्रभाकर

ढलती शाम के वक्त खचाखच भरी बस में सेंट की खूशबू में लबालब जैसे ही वह दो लड़कियां चढ़ी तो सभी का ध्यान उनके जिस्म उघाड़ू तंग कपड़ों की ओर स्वत ही खिंचता चला गया । बस की धक्कमपेल का नाजायज़ फायदा उठाते हुए कुछ छिछोरे किस्म के लड़के रह रह कर उन्हे स्पर्श करते हुए बीच बीच में कुछ असभ्य कमेंट भी कर रहे थे परन्तु वो दोनों लड़कियां इन सबसे बेपरवाह आपस में हँस-हँस कर बातें करने में व्यस्त थीं।

‘इधर बैठ जाओ बेटी !’ सीट पर बैठा हुआ एक बुर्जुग बच्चे को सीट से अपनी गोद में बिठा कर थोड़ा एक तरफ…

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Posted on July 21, 2015 at 8:30am — 22 Comments

चट्टे-बट्टे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘मंत्री जी ! ‘भाई’ अब फिर से नयी ‘डिमांड’ कर रहा है। पिछले हफ्ते डी.आई.जी. साहिब को ‘सेवा’ पहुँचाई है और अभी ‘पार्टी फंड’ भी जमा करवाना है । आपको तो पता ही है कि आपके इलेक्शन के वक्त भी हम किसी भी तरह पीछे नहीं हटे थे।  तो फिर कभी ‘भाई’ तो कभी पुलिस।  ऐसे कैसे चलेगा ?’

‘अरे परेशान काहे हो रहे हो। अब अकेले तुम्हारी वजह से ही तो इलेक्शन नहीं न जीते हैं हम... सभी ने साथ दिया था हमारा और ध्यान भी तो सभी का ही रखना पड़ेगा ना। और तुम घबरा काहे रहे हो, ऊ ससुरा जो पुल बना रहे हो ना उसमें से दो…

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Posted on July 18, 2015 at 12:08am — 9 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 1:26am on May 1, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आदरणीय रवि प्रभाकर जी , लघु-कथा पर अपनी द्वितीय प्रस्तुति पर आपकी प्रतिक्रिया अभी विलम्ब से देखी , आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद। सादर।
At 4:34pm on September 30, 2014, MAHIMA SHREE said…

नमस्कार आ. रवि प्रभाकर भाई साहब ..स्वागत है :)

At 1:57pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री रवि प्रभाकर  जी आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित \ पुरस्कृत  किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:59pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी

सर्व् श्रेष्ठ होना चरम उपलब्धि है i ओ बी ओ का यह सम्मान आपके आत्म  विश्वास को अधिकाधिक बढ़ाएगा , यही कामना है i

At 7:26pm on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:25am on January 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:02pm on October 21, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:40pm on October 20, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 12:40pm on October 20, 2010, Admin said…

 
 
 

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"आ0 तस्दीक अहमद जी आपकी उत्साह वर्धन करती टिप्पणी का हृदय से आभार।"
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