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Ravi Prabhakar
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Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 (विषय: दृष्टि)
"प्रस्‍तुत लघुकथा मात्र एक घटना का विवरण सा बन कर रह गई आदरणीय नीलम जी अभी इस पर कुछ परिश्रम करने की आवश्‍यकता है । लघुकथा की भाषा में भी सहज दिखाई नहीं देती यथा- उद्विग्नता, परिलक्षित, यद्यपि उसे तुरत ही पास इत्‍यादि । और गोबिन्‍द…"
Jul 31
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 (विषय: दृष्टि)
"अच्‍छा विषय चुना आदरणीय बरखा जी परन्‍तु इसका निर्वाहन प्रभावशाली ढंग से नहीं हो पाया जिस वजह से लघुकथा अपनी छोड़ नहीं पाई । बहरहाल आयोजन में सहभागिता के लिए आपका धन्‍यवाद और भविष्‍य के लिए शुभकामनाएं ।"
Jul 31
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 (विषय: दृष्टि)
"अंर्तद्वंद्व से जूझते व्‍यक्‍ित का बहुत ही सटीक चित्रण है इस लघुकथा में । मानव में मानवीयता का जिन्‍दा होना इस लघुकथा के सफल होने की मुहर लगा रहा है। काम, मन्‍िदर, आॅपरेशन, टेंशन आदि शब्‍दों को उद्धरण चिन्‍हों में देना का…"
Jul 31
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 (विषय: दृष्टि)
"आदरणीय तेजवीर भाई जी! हर संवाद में प्रश्‍नसूचक चिन्‍ह ? कई संवादों में प्रश्‍नसूचक चिन्‍ह अनावश्‍यक दिखाई दे रहे हैं।  यथा: तुम्हारे कारण ही मैं इस धंधे के दलदल में फ़ंसी हूँ"?, साँचे में ढला हुआ जिस्म है"?, रत्ती…"
Jul 30
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 (विषय: दृष्टि)
"लघुकथा को शीर्षक से दुबारा पढ़ें कप्‍तान साहिब, लघुकथा शीशे की तरह स्‍पष्‍ट और साफ है। :-)"
Jul 30
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 (विषय: दृष्टि)
"शानदार लघुकथा आदरणीय प्रतिभा जी!  कुछ न कहकर सब कुछ कह दिया । लघुकथा का शीर्षक पूरे कथानक के भाव को सम्‍प्रेषित कर रहा है । इस लघुकथा का वैशिष्‍टय है इसका सटीक शीर्षक चयन । यह शीर्षक स्‍थूल न होकर एक सूक्ष्‍म  व भाव प्रधान…"
Jul 30
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"एक प्रचलित कथा को आधार बनाकर फँतासी शैली में लिखी इस गहन संदेशयुक्‍त लघुकथा के लिए आपको हार्दिक बधाई आदरणीय सुकुल जी । / ‘‘ हनुमानजी ! देखा ! प्रत्यक्ष द्रष्टा को भी गलत सिद्ध कर दिया न ? यह राम का ‘भारत’ नहीं , कलियुगीन…"
Apr 29
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"वाह! 'इंडिया' और 'भारत' क्‍या बात है! बहुत उम्‍दा लघुकथा आदरणीय गोपाल नारायण जी । पूर्वस्‍मृति शैली के शानदार उपयोग से बहुत प्रभावशाली सृजन । बधाई स्‍वीकार करें ।"
Apr 29
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय कनक हरलालका जी, 'स्‍वतंत्रता' को आधार बनाकर एक तीक्ष्‍ण व्‍यंग्‍य कसा गया है। स्‍वतंत्रता के कार्यक्रम 'मंत्री जी'  के इर्द गिर्द ही घूमते रहते है और इन सब के बीच 'भारत' को अकेला छोड़…"
Apr 29
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"गोष्‍ठी का फीता काटने की बधाई। 'भारत' विषय को सार्थकता से परिभाषित करने का शानदार प्रयास । मेरी और से हार्दिक शुभकामनाएं स्‍वीकार करें । सादर"
Apr 29
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय तस्‍दीक अहमद ख़ां साहिब, लघुकथा में निहित सार्थक संदेश इस लघुकथा की ख़ूबसूरती है। हॉं लघुकथा का ताना बाना थोड़ा उलझ सा प्रतीत हो रहा है।'डिज़र्व' और 'रिज़र्व' पंक्‍ित के माध्‍यम से आरक्षण पर भी…"
Apr 29
Ravi Prabhakar shared Admin's discussion on Facebook
Apr 17
Ravi Prabhakar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"वाह! बहुत ही सधी और शानदार लघुकथा है भाई धर्मेन्‍द्र जी । आपकी कल्‍पना शक्‍ित की दाद देता हूं भाई जी । लघुकथा का शीर्षक ही सब कुछ बयां कर रहा है । बधाई स्‍वीकार करें ।"
Apr 7
Ravi Prabhakar is now friends with savitamishra, saalim sheikh, Sushil Sarna and Seema Singh more
Apr 5
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"हालांकि लघुकथा सरीखी काेमलांगी विधा में पात्रों के चरित्र चित्रण के लिए बहुत कम संभावनाएं होती है परन्‍तु एक सफल रचनाकार का व्‍यापक, प्रामाणिक व सूक्ष्‍म अनुभव ही लघुकथा में चरित्र बनकर प्रतिफलित होता है। प्रासंगिक, संक्षिप्‍त और…"
Mar 31
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"संवादात्‍मक शैली में लिखी प्रस्‍तुत लघुकथा विषय से न्‍याय करती एक प्रभावशाली लघुकथा है। लघुकथा का संवाद / मैं तो दोनो बहन भाई के बीच की नोक -झोंक के लिए तरस ही गयी ।/ अंतस की टीस काे बाखूबी उभार रहा है। इस बढ़ीया प्रयास हेतु बधाई…"
Mar 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Patiala
Profession
Computers
About me
A Straight Forwerd Man.

Ravi Prabhakar's Blog

सिसकियां (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘चल अब छोड़, जाने भी दे! इसमें इतना रोने की क्या बात है, यह कोई नयी बात थोड़े ही है। हम जैसे लोगों के साथ तो ये हमेशा से ही होता आया है। तू इतने टेसुए क्यों बहा रही हो ? वैसे गल्ती भी तेरी ही है, अगर तुझे प्यास लगी थी तो अपने पीने का पानी बाहर ही तो रखा होता है फिर तू रसोईघर में क्यों गई ?’ सिसक रही अपनी पत्नी को वो दिलासा दे रहा था।

‘मैं तो यही सोच कर इनके यहां काम करने को लगी थी कि चलो पढ़-लिख कर अफसर बन गए है तो क्या हुआ, हैं तो ये हम लोगों में से ही ना। पर ये लोग... कोई और हमारे…

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Posted on January 18, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

मुखौटे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

 ‘बेशक हमारे भाई साहिब को देश छोड़े एक अर्सा हो गया यू.एस.ए. में उन्होनें अपना बिजनेस एम्पायर खड़ा कर लिया है पर उन्हें अपने देश और अपनी संस्कृति से अब भी बहुत प्यार है। इसलिए वो अपने बेटे के लिए मेम नहीं बल्कि एक सुसंस्कृत भारतीय बहू चाहते है।’ शहर के नामचीन बिल्डर अपनी डाॅक्टर पत्नी सहित मेयर साहिब के घर उनकी इकलौती बेटी के लिए अपने भतीजे के रिश्ते के सिलसिले के लिए बतिया रहे थे।

‘यह तो बहुत अच्छी बात है। मेरी बहन व बहनोई भी यू.एस.ए. सिटीज़न हैं । वो आपके भाई साहिब को बहुत…

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Posted on December 19, 2015 at 1:46pm — 9 Comments

संत्रास (लघुकथा) : रवि प्रभाकर

ढलती शाम के वक्त खचाखच भरी बस में सेंट की खूशबू में लबालब जैसे ही वह दो लड़कियां चढ़ी तो सभी का ध्यान उनके जिस्म उघाड़ू तंग कपड़ों की ओर स्वत ही खिंचता चला गया । बस की धक्कमपेल का नाजायज़ फायदा उठाते हुए कुछ छिछोरे किस्म के लड़के रह रह कर उन्हे स्पर्श करते हुए बीच बीच में कुछ असभ्य कमेंट भी कर रहे थे परन्तु वो दोनों लड़कियां इन सबसे बेपरवाह आपस में हँस-हँस कर बातें करने में व्यस्त थीं।

‘इधर बैठ जाओ बेटी !’ सीट पर बैठा हुआ एक बुर्जुग बच्चे को सीट से अपनी गोद में बिठा कर थोड़ा एक तरफ…

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Posted on July 21, 2015 at 8:30am — 22 Comments

चट्टे-बट्टे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘मंत्री जी ! ‘भाई’ अब फिर से नयी ‘डिमांड’ कर रहा है। पिछले हफ्ते डी.आई.जी. साहिब को ‘सेवा’ पहुँचाई है और अभी ‘पार्टी फंड’ भी जमा करवाना है । आपको तो पता ही है कि आपके इलेक्शन के वक्त भी हम किसी भी तरह पीछे नहीं हटे थे।  तो फिर कभी ‘भाई’ तो कभी पुलिस।  ऐसे कैसे चलेगा ?’

‘अरे परेशान काहे हो रहे हो। अब अकेले तुम्हारी वजह से ही तो इलेक्शन नहीं न जीते हैं हम... सभी ने साथ दिया था हमारा और ध्यान भी तो सभी का ही रखना पड़ेगा ना। और तुम घबरा काहे रहे हो, ऊ ससुरा जो पुल बना रहे हो ना उसमें से दो…

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Posted on July 18, 2015 at 12:08am — 9 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 1:26am on May 1, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आदरणीय रवि प्रभाकर जी , लघु-कथा पर अपनी द्वितीय प्रस्तुति पर आपकी प्रतिक्रिया अभी विलम्ब से देखी , आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद। सादर।
At 4:34pm on September 30, 2014, MAHIMA SHREE said…

नमस्कार आ. रवि प्रभाकर भाई साहब ..स्वागत है :)

At 1:57pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री रवि प्रभाकर  जी आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित \ पुरस्कृत  किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:59pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी

सर्व् श्रेष्ठ होना चरम उपलब्धि है i ओ बी ओ का यह सम्मान आपके आत्म  विश्वास को अधिकाधिक बढ़ाएगा , यही कामना है i

At 7:26pm on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:25am on January 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:02pm on October 21, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:40pm on October 20, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 12:40pm on October 20, 2010, Admin said…

 
 
 

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Sudha mishra is now a member of Open Books Online
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vijay nikore commented on vijay nikore's blog post आशंका के गहरे-गहरे तल में
"सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीय तेज वीर सिंह जी"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन क्षणिकाएँ लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आद0हरिहर झा जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना है पर यह दुबारा पोस्ट हुई है। एक बात और आपने "आदरणीय…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post वापसी.... लघुकथा
"आद0 वीरेंदर वीर मेहता जी सादर अभिवादन। बढ़िया मार्मिक लघुकथा हुई है। बहुत बहुत बधाई इस सृजन पर।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"नरेंद्र सिंह चौहान जी क्या आप प्रतिक्रिया के बाद फिर पलट कर कभी नहीं देखते क्या,, क्योकि अगर देखते…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन, वाह वाह, मजा आ गया पढ़के। बधाई देता हूँ आपको।…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'नज़रिये के ज़रिये' (लघुकथा)
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on rajesh kumari's blog post नाभी में लेकर कस्तूरी  तय करता मृग कितनी दूरी (गीत राज )
"आद0 बहन राजेश कुमारी जी बेहतरीन गीत लिखा है आपने, कई बातों को आपने छुआ है। बहुत बहुत बधाई आपको।"
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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
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