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सीतापुर में आयोजित ओ बी ओ काव्य समारोह में जनकवि आलोक सीतापुरी पुनः सम्मानित !

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आदरणीय अम्बरीश जी, सादर. 

सफल आयोजन हेतु बधाई. मेरी ऑंखें मुझे ही उस समारोह में ढूढ़ रही थीं .

धन्यवाद आदरणीय प्रदीप साहब ! इस काव्य समारोह में आपकी द्वारा प्रेषित की आपकी निम्नलिखित रचना श्री अमरेन्द्र सिंह द्वारा पढ़कर सुना दी गयी थी !

“कर लो अब तैयारी”

सूरज की गरमी को देखो, पड़ती सब पे भारी

सूखे ताल तलैया भाई,  पिघली सड़कें सारी

सूख चली देखो हरियाली, सहमा उपवन सारा. 

पंथिन को तो छांह नहीं अब,  क्योंकर चलता आरा

 

पशु पक्षी सब प्यास के मारे,  हुए  हाल बेहाल 

जल संसाधन मंत्री ए.सी., बैठे फेंके जाल 

उनकी बात भी छोड़ो भैया, ऐसा कुछ करवा दो 

आँगन अन्दर बाहर तालन, मां पानी भरवा दो 

 

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

जैसे बचाते अपना जीवन वैसे बचा अब बारी 

जल संरक्षण किया नहीं तो, जल पे मारामारी ||

पशु पक्षी सब प्यास के मारे, हुए हाल बेहाल
जल संसाधन मंत्री ए.सी., बैठे फेंके जाल

वाह वाह ...  अच्छी कविता से मुग्ध किया आपने आदरणीय प्रदीपजी. लोगों की दुख-दशा पर आपकी झुंझलाहट अच्छी लगी.

सीतापुर के सद्यः समाप्त हुए काव्य-समारोह में आपकी परोक्ष-उपस्थिति के लिये आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ.

  

स्वागत है आदरणीय सौरभ जी ! आप से मैं भी सहमत हूँ !

आदरणीय अम्बरीष भाईजी, आपसे हुए कल रविवार  के संवाद ने अपार खुशी दी.  वार्तालाप के पार्श्व से प्रस्तुतिकरण की ध्वनि अभिभूतकारी थी, मानों आपने मुझे इस समारोह में ही सम्मिलित कर लिया.

आपकी अनुकरणीय संलग्नता और सतत साहित्य साधना सभी सदस्यों के लिये मार्ग-दर्शन सदृश है. इस सफल आयोजन के लिये आपको तथा समस्त सदस्यों को मेरा सादर प्रणाम और हार्दिक शुभकामनाएँ.

नमस्कार आदरणीय सौरभ भाई जी ! कार्यक्रम की सराहना के लिए हार्दिक आभार मित्रवर ! आप कार्यक्रम स्थल से भले ही दूर थे पर आपसे हुए संवाद के मध्य  आपकी दूरभाषिक उपस्थिति मुझे भी अभिभूत कर रही थी ! वास्तव में इस कार्यक्रम की सफलता के पार्श्व में ओ बी ओ मित्रों का सहयोग व आप सभी की हार्दिक शुभकामनाएं ही हैं !` जय ओ बी ओ  | 

आदरणीय (गुरुदेव )  सौरभ  जी , सादर. 

बहुत अल्प काल में रचना तैयार  हुई. भाई अम्बरीश जी ने मेरी भावनाओं का बहुत सम्मान किया, श्रम किया. उनका ऋणी हूँ. अमरेन्द्र जी ने अपना स्वर दिया उनका भी आभारी हूँ. आपकी सराहना से मेरा मनोबल बढा.  ऐसा ही स्नेह बनाये रहिये .

आदरणीय प्रदीप साहब ! ऋणी क्यों होते हैं आदरणीय? भाई जी जब आप सम्मान के योग्य हैं तो सम्मान मिलना तय ही है | शेष तो हमने अपना दायित्व ही निभाया है ! जय ओ बी ओ !

आदरणीय अम्बरीश   जी , सादर. 

बहुत अल्प काल में  तैयार  हुई रचना पर आपने  मेरी भावनाओं का बहुत सम्मान किया, श्रम किया  आपका ऋणी हूँ.  अपनी माला की  लड़ी में पिरोया, मेरा उत्साह बढा. और सीखूंगा आप के सानिध्य में. स्नेह दिए रहिये.   अमरेन्द्र जी ने अपना स्वर दिया उनका भी आभारी हूँ. 

क्या कह रहे हैं आदरणीय ......आप ऋणी क्यों होते हैं ? भाई जी जब आप सम्मान के योग्य हैं तो सम्मान मिलना तय ही है |

आदरणीय अम्बरीश जी आपके प्रयास सार्थक और सशक्त रंग बिखेर रहे हैं बहुत बहुत बधाई आपको और आदरणीय आलोक जी को भी ओ बी ओ यूँ ही दिन दुनी तरक्की करे और इसके रचनाकार भी .

स्वागतम भाई अरुण जी ! इन बेशकीमती वचनों के लिए आपका हार्दिक आभार मित्रवर ! जय ओ बी ओ !

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