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नहीं मिठाई मोबाइल पर
देनी हो तो सच्ची दो
1- जाया होता वक्त हमारा
इन भ्रमजालों में पड़कर
पढ़ें पाठशाला में जाएँ
बुद्धि हमें तुम पक्की दो
नहीं---------------
2- दूर रहें ऐसे खेलों से
गलत राह ले जाएँ जो
तोड़ तिलस्मों की दुनियाँ को
सीख हमें कुछ अच्छी दो
नहीं-----------------
3- ध्यान करो मम्मी पापा हम
यंत्रों से दुख झेल रहे
जुड़ें किताबों की दुनियाँ से
प्यारी सी इक झप्पी दो
नहीं-------------------
4- मत छोड़ो आया पर
दादी बाबा को ले आओ तुम
सुनें कथाएँ उनसे सुंदर
हमको ऐसी युक्ति दो
नहीं-----------------

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Replies to This Discussion

आदरणीय उषा अवस्थी जी बहुत सुंदर व सिख भरी कविता के लिए बधाई .

हार्दिक आभार

बहुत सुंदर सिख देती हुई कविता लिखी है आपने आदरणीय उषा जी | हार्दिक बधाई |

धन्यवाद कल्पना जी।

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