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फूल खिले जो बगिया में
वह कितने सुन्दर लगते हैं
लाल ,गुलाबी,नीले,पीले
मन खुशियों से भरते हैं

तितली उड़ती रंग-बिरंगी
फूलों पर है इधर-उधर
भँवरे भी गुँजन करते
उन पर मंडराने लगते हैं

चूँ-चूँ करती चिड़ियाँ भी
आकर डाली पर खेल रहीं
इस डाली से उस डाली पर
उड़ कर झूला झूल रहीं

हाथ बढ़ा कर फूलों को
मुन्ना है लगा तोड़ने जब
तब माँ ने उसको समझाया
इनको है छूना तुम मत

बड़े परिश्रम से यह पौधे
बढ़ते और पनपते हैं
लगे हुए डाली पर ही
यह अच्छे सुन्दर लगते हैं

मुन्ना तब माँ से बोला
मैं इनमें पानी डालूँगा
सुन्दर सुरभित पुष्प वाटिका
मित्रों को दिखलाऊँगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Replies to This Discussion

बहुत ही सुंदर बाल कविता बधाई हो आदरणीया ऊषा अवस्थी जी 

प्रकृति व पर्यावरण चेतना पर बहुत बढ़िया बालमन की रचना। हार्दिक बधाई आदरणीया उषा अवस्थी साहिबा।

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